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India China Buffer Zone; Major Shaitan Singh Memorial Demolition Controversy | रेजांग-ला में मेजर शैतान सिंह का मेमोरियल ध्वस्त: कांग्रेस का आरोप- बफर जोन में था, चीन के दबाव में तोड़ा; सरकार बोली-ऐसा कुछ नहीं हुआ

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नई दिल्ली3 घंटे पहले

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परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह को श्रद्धांजलि के तौर पर 25 अक्टूबर 2020 को 8 कुमाऊं रेजिमेंट ने यह स्मारक बनाया था। - Dainik Bhaskar

परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह को श्रद्धांजलि के तौर पर 25 अक्टूबर 2020 को 8 कुमाऊं रेजिमेंट ने यह स्मारक बनाया था।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें उन्होंने लिखा है-1962 में रेजांगला युद्ध के महानायक मेजर शैतान सिंह के चुशूल लद्दाख में बने मेमोरियल को 2021 में ध्वस्त करने की खबर बहुत पीड़ादायक है।

इस पोस्ट में खड़गे ने सवाल उठाया है कि क्या यह इसलिए किया गया, क्योंकि चीन के साथ बातचीत के बाद अब वह भारतीय क्षेत्र, बफर जोन में आ गया है। मोदी सरकार चीनी मंसूबों के आगे घुटने टेक चुकी है।

हालांकि यह खबर सामने आते ही एक बार फिर ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या चीन ने वास्तव में भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया है? हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने 29 दिसंबर को कहा है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

जानिए क्या है पूरा मामला…

मेजर शैतान सिंह के शव के साथ उनके साथी, ये तस्वीर सोशल मीडिया पर है। इसी जगह मेमोरियल बनाया गया था।

मेजर शैतान सिंह के शव के साथ उनके साथी, ये तस्वीर सोशल मीडिया पर है। इसी जगह मेमोरियल बनाया गया था।

दरअसल, लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के सदस्य खोनचोक स्टैनजिन ने 25 दिसंबर को यह दावा किया कि LAC पर रेजांगला में बना मेजर शैतान सिंह का मेमोरियल तोड़ दिया गया है। जून 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद यह इलाका बफर जोन बना दिया गया है।

स्टैनजिन ने टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि मुखपारी से रेचिनला और रेजांगला तक का पूरा क्षेत्र अब बफर जोन में है और इसमें सैनिकों और नागरिकों किसी के भी आने-जाने पर रोक है। यहां तक कि हमारे खानाबदोश (चरवाहे) भी गर्मियों में वहां नहीं जा पाते।

रेजांगला में जहां यह मेमोरियल था, यह वही जगह है जहां 1962 में परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह का शव मिला था। यह मेमोरियल 25 अक्टूबर 2020 को 8 कुमाऊं रेजिमेंट ने बनाया था। भारतीय सेना ने ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान हजारों चीनी सैनिकों से मुकाबले के बाद यहां कब्जा किया था।

2021 में राजनाथ सिंह ने किया था राष्ट्र को समर्पित
इधर, कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि रेजांगला के 114 शहीदों की याद में बनाया गया वॉर मेमोरियल आज भी अहीर धाम (लद्दाख) में मौजूद है, जिसे 5 अगस्त 1963 को बनाया गया था। इसकी मरम्मत के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने नवंबर 2021 को इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया था।

जिस स्मारक को हटाने की बात कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखी है, वह 10 फरवरी 2021 को विघटन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में हटाया गया था। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि इसका कोई ऐतिहासिक महत्व नहीं था।

यह शैतान सिंह की यूनिट यानी 8 कुमाऊं के सैनिकों के जरिए बनाया गया था। 1962 के बाद से भारत ने इस क्षेत्र में अपनी स्थिति नहीं बदली है। जवानों की तैनाती प्रोटोकॉल और समझौतों के अनुसार ही है।

अब इस आरोप-प्रत्यारोप से इतर कुछ बातें…

  • भारत का दावा है कि हमारी एक इंच भी जमीन चीन के कब्जे में नहीं है। हालांकि, 2022 की शुरुआत में दोनों देशों ने बफर जोन लागू करने का फैसला किया था। बफर जोन में सभी स्थाई ढांचों को तोड़ा जाना है। स्टैनजिन ने जो तस्वीर शेयर की है, उससे पता चलता है कि स्मारक अक्टूबर 2020 तक भारतीय नियंत्रण में था, जब कुमाऊं रेजिमेंट की 8वीं बटालियन ने इसका नवीनीकरण किया।
  • उधर, जनवरी 2023 में नई दिल्ली में पुलिस के वार्षिक सम्मेलन में पेश किए गए एक रिसर्च पेपर में लेह के सीनियर एसपी पी.डी. नित्या ने कहा था कि भारत ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर काराकोरम दर्रे से चुमार तक 65 पेट्रोलिंग पॉइंट्स में से 26 पर अपनी पकड़ खो दी है।
  • कुछ सैन्य विश्लेषकों का यह भी अनुमान है कि चीनी सेना ने भारत के दावे वाले लगभग 1000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। भारतीय सैनिक लगभग दो साल पहले कैलाश रेंज से पीछे हट गए थे, लेकिन इसकी खबरें अब सामने आ रही हैं।
  • भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच अब तक 20 दौर की बातचीत हो चुकी है। चीनी उत्तर पूर्वी लद्दाख में देपसांग घाटी और दक्षिण पूर्वी लद्दाख में डेमचोक में बफर जोन बनाने से इनकार कर रहे हैं, दोनों ही जगह भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मेजर शैतान सिंह और उनकी वीरता की कहानी

18 नवंबर 1962 की सुबह 3 बजे, लद्दाख की रेजांगला आर्मी पोस्ट पर जमा देने वाली ठंड थी। इस दौरान मेजर शैतान सिंह अपने 124 जवानों के साथ 303 राइफल और लाइट मशीन गन लेकर डटे हुए थे। अचानक दो हजार से ज्यादा चीनी सैनिकों ने धावा बोल दिया। हमारे जवानों ने 1300 चीनी सैनिक मार गिराए और उन्हें श्रीनगर की तरफ आगे बढ़ने से रोक दिया। इस जंग के हीरो थे मेजर शैतान सिंह, जिन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया।

1 दिसंबर को ही मनी 100वीं जयंती
1 दिसंबर को ही मेजर शैतान सिंह की 100वीं जयंती मनाई गई है। 1962 की चीन की लड़ाई में शहादत के 85 दिन के बाद उनका शव मिला था। जब भारत-चीन की ओर से लड़ाई रुक गई थी। उनके साथ रेडियो ऑपरेटर रहे कैप्टन रामचंदर ने बताया था कि उनके आखिरी शब्द थे- “तुम जाओ और बताना कि हम आखिर तक कैसे लड़े थे। सबको हमारे जवानों का शौर्य पता चलना चाहिए। ये मेरा आदेश है…” पढ़ें पूरी खबर…

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