होम राज्य उत्तर प्रदेश वाराणसी में ज्ञानवापी की तरह बदायूं की जामा मस्जिद शम्सी का भी...

वाराणसी में ज्ञानवापी की तरह बदायूं की जामा मस्जिद शम्सी का भी वैज्ञानिक सर्वे कराने की मां,अगली सुनवाई अब छह जनवरी को,

बदायूँ।मंगलवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्ष और उनके वकील न्यायालय पहुंचे। इस दौरान अखिल भारत हिंदू महासभा के वकील ने जामा मस्जिद का निरीक्षण कराने के संबंध में अर्जी पेश की। 

सुनवाई के दौरान बदायूं की जामा मस्जिद शम्सी का भी वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग हुई है। जमीन पर पूर्व में नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा किया गया है मंगलवार को अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से इस संबंध में सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक) न्यायालय में अर्जी दी गई। इसके समर्थन में गजेटियर के साक्ष्य प्रस्तुत किए। अब इस प्रकरण पर छह जनवरी को सुनवाई होगी।

अगस्त 2022 में हिन्दू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने बदायूँ की जिला अदालत में मस्जिद में पूजा पाठ करने की याचिका दायर दी थी। हिन्दू पक्ष ने बदायूँ की जामा मस्जिद शम्सी में पूजा के अधिकार और मस्जिद के ASI के सर्वेक्षण की माँग की थी। उन्होंने दावा किया था कि जामा मस्जिद शम्सी वाली जमीन पर अतीत में नीलकंठ महादेव मंदिर था। मुस्लिम शासकों ने इस मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद बना दी थी। वहाँ अभी भी मंदिर के अवशेष होने का तर्क देते हुए हिंदू पक्ष ने वहाँ पूजा की मंज़ूरी की माँगी थी।

बताते चलें कि इस केस में अदालती सुनवाई के दौरान जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी, जिला प्रशासन, वक्फ बोर्ड, पुरातत्व विभाग ने अपना-अपना पक्ष पेश कर चुका है। वहीं जामा मस्जिद शम्सी की तरफ से इस याचिका को खारिज करने की माँग की गई है।

मंगलवार को इस अदालत में सुनवाई के दौरान हिंदू महासभा के अधिवक्ता वेदप्रकाश साहू ने जामा मस्जिद शम्सी वैज्ञानिक सर्वे की अर्जी भी लगा दी। उनके मुताबिक, याचिका के समर्थन में अदालत को गजेटियर में मौजूद सुबूत दिए गए हैं। अब याचिका सुनवाई का इंतजार है। दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद बदायूँ की जामा मस्जिद शम्सी भी इस्लामी आक्रांताओं ने भगवान शंकर के मंदिर को नष्ट कर खड़ी की थी।

हिन्दू पक्ष ने दावा है कि इस जगह पर भारत में इस्लामी आक्रांताओं के आने से पहले भगवान शिव का नीलकंठ मन्दिर था। बदायूँ के सूबेदार रहने के दौरान भारत के पहले इस्लामिक शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद इल्तुतमिश ने इस मंदिर को तोड़कर यहाँ जामा मस्जिद शम्सी बनवाई थी।

इसका पहला सुबूत पहला प्रमाण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की साल 1875 से 1880 तक बदायूँ से लेकर बिहार तक किए गए सर्वेक्षण की 148 साल पुरानी ‘TOURS IN THE GANGETIC PROVINCES from Badaon to Bihar’ नाम की रिपोर्ट में मिलता है। इसे खुद ASI के नींव रखवे वाले अलेक्जेंडर कनिंघम ने तैयार किया था।इस रिपोर्ट के पहले पेज पर ही बदायूँ की विवादित जामा मस्जिद शम्सी की सर्वेक्षण रिपोर्ट है। इस सर्वे रिपोर्ट में लिखा है कि बदायूँ में इस्लामिक आक्रांताओं के शासन से पहले यहाँ के राजा महिपाल ने हरमंदर नाम से एक हिन्दू मन्दिर बनवाया था। इसे जिसे मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़ दिया था और इसी जगह पर बदायूँ की जामा मस्जिद को बनवाया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here