होम राज्य उत्तर प्रदेश भगवान का भक्त ही गीता ज्ञान का अधिकारी : महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद...

भगवान का भक्त ही गीता ज्ञान का अधिकारी : महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती महाराज

  • गीता जयंती के उपलक्ष्य में सात दिवसीय सत्संग का हुआ शुभारंभ

महोली (सीतापुर)। गीता जयंती के उपलक्ष्य में कठिना तट स्थित श्रीराधाकृष्ण धाम प्रज्ञानं सत्संग आश्रम में सात दिवसीय सत्संग का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। त्रिवेणी अलमीरा के चेयर पर्सन वरुण तिवारी ने कथा व्यास महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी का तिलक वंदन एवं माल्यार्पण किया।


कथा के पहले दिन महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी ने श्रीमद्भगवद्गीता जी के प्रथम अध्याय पर चर्चा की। स्वामी जी ने बताया कि भगवान ने अर्जुन से कहा कि जो भक्त होता है वही गीता ज्ञान का अधिकारी होता है, जो भक्त नहीं है इस ज्ञान का अधिकारी नहीं है। दूसरे दिन सुबह की बेला में महामंडलेश्वर जी ने कलिसंतरणोपनिषद की व्याख्या की। स्वामी जी ने पहले चारों वेद और उनके उपवेदों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि संसार में मनुष्य का जीवन कैसे नियमित हो, विचारवान हो यह वेद बताते हैं। स्वामी जी ने बताया कि वेदों के दो विभाग होते हैं, प्रमाता शोधक विभाग और प्रमेय शोधक विभाग। प्रमाता शोधक विभाग के बारे में बताते हुए महामंडलेश्वर स्वामी जी ने कहा कि यह जो जानने वाला है अर्थात जीव, इसकी शुद्धि। उन्होंने बताया इस को पूर्व मीमांसा भी कहते हैं। स्वामी जी ने वेद के दूसरे विभाग के बारे में बताते हुए कहा कि जिसे हम जानना चाहते हैं या पाना चाहते हैं, वह परमात्मा कैसा है, ब्रह्म कैसा है, आत्मा कैसी है ? इसको उत्तर मीमांसा भी कहते हैं। कार्यक्रम में माउंट आबू से पधारे स्वामी जगदानंद सरस्वती जी महाराज तथा अयोध्या से आए स्वामी ब्रजेंद्रदास जी महाराज, आश्रम के महंत स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज व अन्य संत भी मौजूद रहे। अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रृद्धालु मौजूद रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here