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ज्ञान प्राप्त करने के लिए श्रृद्धा होना आवश्यक : महामंडलेश्वर

-गीता जयंती पर सात दिवसीय सत्संग का तीसरा दिवस

महोली, सीतापुर। श्रद्धावान को ही ज्ञान प्राप्त होता है। यह बात कठिना तट स्थित श्रीराधाकृष्ण धाम प्रज्ञानं सत्संग आश्रम में गीता जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय सत्संग के पांचवें दिन कथा व्यास महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी ने कही।

तीसरे दिन महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती तथा अन्य संतों के तिलक वंदन के उपरांत कथाव्यास महामंडलेश्वर स्वामी जी ने श्रीमद्भगवद्गीता जी पर चर्चा करते हुए बताया कि गीताजी का मनन चिंतन करने से उद्धार हो जाएगा। स्वामी जी ने बताया कि सभी को प्रारब्ध का भोग भोगना पड़ता है। हर जीव अपने प्रारब्ध का भोग कर रहा है। स्वामी जी ने कहा कि परमात्मा की शरण में परम शांति मिलती है। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञान प्राप्त करना है तो पहली शर्त श्रद्धावान होना आवश्यक है। दूसरी शर्त विश्वास तथा तीसरी शर्त जिज्ञासु होना है। ऐसा होने पर ही ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसके पहले मुंबई से आए स्वामी महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती ने कहा कि जहां संत होते हैं वहां सत्संग होता है। उन्होंने कहा कि गीताजी समाधान का ग्रंथ है। अंत मे आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रृद्धालु मौजूद रहे।

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