बिल्सी में अयोध्या, काशी,की तरह ही भव्य रूप से मनाई जाती है देव दीपावली।बिल्सी नगर में इसकी शुरुआत सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम के महंत श्री मटरू मल शर्मा(महाराज) की ओर से ही की गई है जो निरन्तर गत बर्षों से जारी है,
बिल्सी।सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम गत बर्षों की भांति इस बर्ष भी देव दीपावली को और भव्य बनाने की तैयारी में है। देव दीपावली के दौरान बिल्सी नगर में इस वर्ष 11 हजार दीये जलाने की तैयारी की गई है।




देव दिपावली का त्योहार 19 नवम्बर को मनाया जाना है। इसके लिए बालाजी धाम ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।इसके लिये मंदिर कार्यकर्ता दिन रात दिए तैयार कर उसमें घी और बत्ती डालकर रख रहे हैं जिनको कल सुबह से पूरे नगर में वितरण किया जाएगा,जिनको नगर वासी शाम 6 बजते ही सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम में पहला दिया प्रज्वलित होते ही सभी नगर वासी भी अपने घरों व प्रतिष्ठानों पर दीप प्रज्वलित कर देव दीपावली पर बिल्सी नगर को रोशन कर देंगे।
क्यों मनाया जाता है देव दिपावली का त्योहार?
मान्यताओं के अनुसार इस दिन शंकर भगवान ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था. इसी खुशी में देवताओं ने इस दिन स्वर्ग लोक में दीपक जलाकर जश्न मनाया था. इसके बाद से हर साल इस दिन को देव दिपावली के रुप में मनाया जाता है. इस दिन पूजा का विशेष महत्व होता है.
इस त्योहार को लेकर यह भी मान्यता है कि इस दिन देवता पृथ्वी पर आते हैं. इस माह में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्वों को प्रमाणित किया है. जिस वजह से कार्तिक पूर्णिमा के पूरे महीने को काफी पवित्र माना जाता है.


















