बिल्सी।सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम बिल्सी में कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली धूमधाम से मनाई गई. इस मौके पर महन्त श्री मटरू मल शर्मा(महाराज)ने बालाजी धाम में शाम 6 बजे पहले दीप जलाने के साथ ही नगर वासियों ने अपने प्रतिष्ठानों और घरों पर दिये जलाकर देवताओं का स्वागत सत्कार किया,इसी के साथ नगर में आतिशबाजी भी की गई.






मान्यता है कि इस दिन देवता दिपावली मनाते हैं. पौराणिक कथाओं में इस बात का उल्लेख है कि त्रिपुरासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से सभी बहुत त्रस्त हो चुके थे. इस राक्षस से मुक्ति दिलाने के लिए ही भगवान शिव ने इसका संहार कर दिया था. उसके आतंक से जिस दिन मुक्ति मिली थी, उस दिन कार्तिक पूर्णिमा का दिन था. तभी से भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी पड़ा. इससे सभी देवों को अत्यंत प्रसन्नता हुई. तब सभी देवतागण भगवान शिव के साथ काशी पहुंचे और दीप जलाकर खुशियां मनाई. कहते हैं कि तभी से ही कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिपावली मनाने का प्रचलन है.
इस कार्तिक माह में ही देवी लक्ष्मी की जन्म हुआ था और इसी महीने में भी भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागे थे. कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर श्रद्धालु गंगा में पवित्र डुबकी लगाते हैं और शाम को मिट्टी के दीपक या दीया जलाते हैं.ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही समस्त देवी-देवता स्वर्ग से धरती पर आते हैं और गंगा स्नान करने के बाद दीप जलाकर देव दीपावली का त्योहार मनाते हैं.

























