बदायूँ । देश के कई शहरों में विजयादशमी और दशहरे की धूम है। असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस मौके पर देश के अलग अलग हिस्सों में रावण दहन करने की परंपरा है। कई शहरों में रावण दहन हुआ।लेकिन बदायूँ की प्रोफेसर कालोनी स्थित घर के गार्डन में भी बाकायदा राम स्वरूप में सज कर रावण रूपी पुतले का दहन कर दशहरा मनाया,बच्चों ने इसकी तैयारी में बड़ी मेहनत की इसके लिये दो तीन दिन पहले से जोर शोर से रावण के पुतले को बनाना शुरू कर दिया था इस कार्य मे उनकी मदद के लिये घर का हर सदस्य अपना पूरा योगदान देता रहा,क्या दादी अम्मा, क्या मम्मी क्या पापा सभी ने बच्चों की भावनाओं की कद्र करते हुए उनका सहयोग किया,
बदायूँ का यह परिवार बैसे भी बदायूँ में साहित्यक सांस्कृतिक संस्कृति के लिये अंतरष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है आज उसी परिवार के नन्हे मुन्ने बच्चोँ ने अपनी विरासत की पहचान के अनरूप दशहरे के पर्व को बहुत ही शानदार ढंग से मनाया।हम बात कर रहे हैं बदायूँ को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बदायूँ को पहचान दिलाने वाले कवि स्व.डॉक्टर उर्मिलेश के नाती और बदायूँ क्लब बदायूँ के सचिव डॉ अक्षत अशेष के दोनों बच्चों के बारे में जिन्होंने आज दशहरे के पर्व को मनाते हुए समाज को को एक संदेश भी दिया।
डॉ अक्षत अशेष के पुत्र आगम अशेष ने वर्तमान काल में देश में व्याप्त कोरोना महामारी, असत्य, बेरोजगारी, जातिवाद, अधर्म, अत्याचार, अशिक्षा, अहंकार, गंदगी, भ्रष्टाचार रुपी रावण के दस स्वरुपों का दहन कर इन कुरीतियों को दूर करने के संकल्प लिया। नन्हे बच्चों आगम और विराज ने उत्साह के साथ रावण के पुतले को बनाया और उसके दस रुपों को अलग अलग कुरीति का नाम दिया।बाद में राम का स्वरूप धारण कर उस कुरीति रूपी रावण का पुतला दहन कर समाज मे व्याप्त कुरीतियों का अंत करने का संदेश दिया।



























