बिल्सी. सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम द्वारा आयोजित ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास। पुष्कर पीठाधीश्वर जगद्गुरू श्री रामानुजाचार्य, स्वामी रामचन्द्राचार्य महाराज ने सुकदेव जी महाराज ओर मुनिराज परीक्षित जी की कथा सुनाते हुए बताया कि सुकदेव महाराज ने जगत के प्राणियों पर कृपा करके भगवतत्व को प्रकाशित करने वाले श्रीमद्भागवत महापुराण का विस्तार किया।







अपनी परम निष्काम की अतृप्त लीला-कथा-निष्ठा को राजा परीक्षित को सुनाया जिससे वह परम पद को प्राप्त हो गया। यहां उन्होंने संदेश दिया कि प्रत्येक को लीला-कथा में सदैव निमग्न रहना चाहिए। यदि वे श्रीमद्भागवत की कथा परीक्षित को न सुनाते तो लोक भगवत्कथा ज्ञान से शून्य ही रहता। श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण की वाङ्मयी मूर्ति है। इस पुराण के रूप में भगवान के स्वरूप का वर्णन किया गया है। यह भगवान का सगुण-साकार दिव्य विग्रह ही है। इसके श्रवण से ज्ञान उत्पन्न होता है, ज्ञान से योग में प्रवृत्ति होती है और योग से मुक्ति की प्राप्ति होती है। अत: लीला-कथा- रस-वैचित्र्य से ओतप्रोत भगवत्लीला-कथा के साक्षात्-पुराण-साकार स्वरूप श्रीमद्भागवत-महापुराण के विषय में जब शौनकादि महर्षियों ने यह सुना कि इस कथा का गुणगान शुकदेव जी ने किया है तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि व्यास-नंदन शुकदेव तो महायोगी समदर्शी, विकल्पशून्य, एकान्तमति और अविद्यारूप निद्रा से जगे हुए थे। एक पौराणिक कथा का वर्णन है कि एक बार भगवान सदाशिव पराम्बा भगवती पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। माता पार्वती बीच में हुंकारी भर रही थीं। किन्तु कथा के मध्य में कुछ ही समय पश्चात शंकरप्रिया निद्राभिभूत हो गईं। संयोगवश एक शुक भी वहां बैठकर कथा-श्रवण कर रहा था। जब पार्वती जी सो गई थीं तो उसी शुक शावक ने हुंकारी भरना शुरू कर दिया था। इस प्रकार शंकर जी को पार्वती जी के सो जाने का पता न चला और उनके द्वारा अमर-कथा का अनवरत प्रवाह चलता रहा। अत: शुक ने पूरी कथा सुन ली। जब पार्वती जी जगीं तो उन्होंने अपने प्राणवल्लभ से कहा, ‘प्रभो, इस वाक्य के बाद मैंने कथा नहीं सुनी है क्योंकि मुझे नींद आ गई थी।’ यह जानकर देवाधिदेव के आश्चर्य की सीमा न रही।इस कथा को बड़े ही विस्तार से समझाया,कथा में भक्त पहले दिन से ही आनंद में डूबकर कथा का आनंद ले रहे हैं।
भगवान कृष्ण के जनम की कथा सुनाई।कृष्ण जन्म पर मनाया गया जश्न
कथा व्यास श्री रामचन्द्राचार्य महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में अच्छे व बुरे दिन प्रभु की कृपा से ही आते हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, जेल के ताले टूट गये। पहरेदार सो गये।वासुदेव व देवकी बंधन मुक्त हो गए। प्रभु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है। कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। भगवान का जन्म होने के बाद वासुदेव ने भरी जमुना पार करके उन्हें गोकुल पहुंचा दिया। वहां से वह यशोदा के यहां पैदा हुई शक्तिरूपा बेटी को लेकर चले आये। रामचन्द्राचार्य जी ने कहा कि कंस ने वासुदेव के हाथ से कन्य रूपी शक्तिरूपा को छीनकर जमीन पर पटकना चाहा तो वह कन्या राजा कंस के हाथ से छूटकर आसमान में चली गई। शक्ति रूप में प्रकट होकर आकाशवाणी करने लगी कि कंस, तेरा वध करने वाला पैदा हो चुका है भयभीत कंस खीजता हुआ अपने महल की ओर लौट गया।आज भागवत कथा में धूम धाम से कृष्ण जन्मोत्सव मनाया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
जैसे ही कथा के दौरान भगवान कृष्ण का जन्म हुआ पूरा पांडाल जयकारों से गूंज गया।कृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में चंदौसी से चन्द्र प्रकाश शर्मा दीपू सँग आये कीर्तन मंडली के कलाकारों ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर वधाई गाकर श्रद्धालुओं को नाचने पर मजबूर कर दिया।बहीं बिल्सी के कलाकार मुकेश गुप्ता के भजनों का भी श्रोताओं ने आंनद लिया।भजन संध्या के बाद भक्तों को माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया।सभी भक्तगण ने एक दूसरे को कृष्ण जन्म की बधाईयां दीं।
इस दौरान प्रदीप शर्मा, ओजित शर्मा, संजीव शर्मा, राजीव शर्मा, यश भारद्वाज ,राजीव शर्मा ,पुश्किन माहेश्वरी,देव वार्ष्णेय, कुशाग्र माहेश्वरी,दीपक बाबा, देवांश सोमानी, शिवकुमार,सनुज,रंजन, जितेंद्र, राजेश, स्वतंत्र राठी,संदीप मिश्रा, श्री कांत मिश्रा, शांति देवी,मंजुला शर्मा,रीनू ,मनीषा, रेखा,कल्पना, सारिका राठी, धरती माहेश्वरी, मोहित देवल,देव वार्ष्णेय, मुकेश गुप्ता,प्रवीण वार्ष्णेय, विशाल खाशट, राजा बाबू वार्ष्णेय,अनूप माहेश्वरी, रोहित माहेश्वरी, लालू,टिंकू,आकाश,चारू सोमानी,नरेंद्र गरल,आशीष बशिष्ठ,गिरीश,मुनीश,सुभाष बाहेती, सुवीन माहेश्वरी, हरिश्व्वर राठी,चंद्रपाल माहेश्वरी, आदि हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।

























