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पात्र साधक ही ज्ञान का अधिकारी : ओमकारानंद सरस्वती

  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग का चतुर्थ दिवस

महोली (सीतापुर)। हर किसी को ज्ञान प्राप्त नहीं होता, पात्र साधक को ही ज्ञान प्राप्त होता है। यह बात कठिना तट स्थित श्रीराधाकृष्ण धाम प्रज्ञानं सत्संग आश्रम में आयोजित सत्संग के चौथे दिन स्वामी ओमकारानंद सरस्वती जी ने कही।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में सात दिवसीय आयोजन के चौथे दिन श्रीमद्भागवत महापुराण पर चर्चा करते हुए महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती के कृपा पात्र शिष्य स्वामी ओमकारानंद सरस्वती ने कहा कि समय बहुत बलवान होता है पल भर में राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है। उन्होंने कहा कि संत का अपमान करने वाले का विनाश निश्चित है। इसलिए संत का सम्मान करना चाहिए। स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। जिसके बाद श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर सर्वेशानंद सरस्वती, डाॅ. रामजीदास टंडन, अवधेश वर्मा, धर्मेंद्र मिश्र, विनय मंडल, मास्टर बेनीराम, बालेश्वर, श्याम किशोर दीक्षित, राजेंद्र तिवारी, डाॅ. रेनू वर्मा, साधना श्रीवास्तव, कांती मिश्रा, सरिता गुप्ता, मंजू मिश्रा आदि श्रृद्धालु मौजूद रहे।

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