- शोध रिसर्चर्स के लिए मील का पत्थर साबित होगी : कुलपति
- रजिस्ट्रार डॉ शर्मा बोले, नए ज्ञान का प्रसार समय की दरकार
- यूपी समेत आठ स्टेट्स के 195 डेलीगेट्स ने की शिरकत
- गंभीर कोरोना संक्रमण का इलाज़ हॉस्पिटल में कराएं : प्रो. पांडा
- हर्बल दवाइयों पर गुणवत्ता नियंत्रण अनिवार्य : प्रो. देवांगन
जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विभु प्रसाद पांडा बोले, कोरोना वायरस बहुत खतरनाक है, क्योंकि यह बार-बार अपनी संरचना को तब्दील कर रहा है। यह बहुत तेजी से इंसानों को संक्रमित कर रहा है। हालांकि मॉडर्न मेडिसिन और वैक्सीन निरंतर विकसित हो रही हैं। शोध निरंतर जारी हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के ट्रीटमेंट के लिए मेडिसिन और वैक्सीन उपयोग की जा रही हैं, लेकिन इनकी भी कुछ सीमाएं हैं। सच यह है, भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में कम समय में टीकाकरण असंभव-सा है। डॉ. पांडा तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी की ओर से कोरोना वायरस संक्रमण में आयुष दवाओं के तर्कसंगत टॉपिक पर आयोजित छह दिनी फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम – एफडीपी में बोल रहे थे। इससे पूर्व यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह ने बतौर चीफ गेस्ट एफडीपी का शुभारम्भ किया। एफडीपी में रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा और एसोसिएट डीन डॉ. मंजुला जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। एफडीपी में यूपी के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, एमपी, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान सरीखे स्टेट्स की 195 फैकल्टी, रिसर्चर्स, स्टुडेन्ट्स ने भाग लिया। वीसी प्रो. सिंह बोले, कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी की यह एफडीपी फैकल्टी, रिसर्चर्स, स्टुडेन्ट्स के लिए मील का पत्थर साबित होगी। कोविड-19 के दौरान आयुष दवाइयां वरदान साबित हुई हैं। उन्होंने फार्मेसी के निदेशक प्रो. अनुराग वर्मा और उनकी टीम को एफडीपी के आयोजन की बधाई देते हुए उम्मीद जताई, कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी भविष्य में भी ऐसी समसामायिक एफडीपी का आयोजन करता रहे। रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने कहा, कोविड-19 के दौरान नए ज्ञान का प्रसार समय की आवश्यकता हैं। उन्होंने आशा जताई, यह एफडीपी वैज्ञानिकों प्रभावी दवाएं विकसित करने में सहायता करेगी। एसोसिएट डीन डॉ. मंजुला जैन बोलीं, आयुष दवाएं वास्तव में वरदान हैं क्योंकि आधुनिक दवाइयों का कोविड -19 संक्रमण के इलाज़ में आंशिक प्रभाव रहा हैं। कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी के निदेशक प्रो. अनुराग वर्मा ने सभी मेहमानों का स्वागत किया, जबकि एफडीपी के कन्वीनर डॉ. ओम प्रकाश गोशाईन और कॉर्डिनेटर श्री सत्यम शर्मा ने संयुक्त रूप से किया।
आधुनिक चिकित्सा न केवल महंगी है बल्कि इसके दुष्प्रभाव भी हैं। डॉक्टर पांडा बोले, गिलोय, तुलसी, लहसुन, अश्वगंधा आदि सरीखे प्राकृतिक पौधों के असर को लेकर रिसर्च करने का यह सही समय है। आयुष-64, कोरोनिल जैसी मेडिसिन पहले से ही बाजार में हैं। इन दवाइयों को डॉक्टरों की देखरेख में लिया जाना चाहिए। आयुर्वेदिक काढ़े की तरह इन दवाइयों का अति प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि आप ने इन दवाइयों का अधिक प्रयोग कर लिया तो इसके गंभीर और लम्बे समय तक होने वाले दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इन दवाइयों का प्रयोग हल्के से मध्यम संक्रमण के इलाज के लिए किया जाना चाहिए। गंभीर संक्रमण का इलाज अस्पतालों में किया जाना चाहिए। हाईजिया संस्थान के शोध प्रमुख एवं प्रोफेसर डॉ अभिषेक गुप्ता बोले, औषिधीय जड़ी-बूटियों और उनके फाइटोकंपाउंड को कैंसर और वायरल संक्रमण जैसी अन्य बीमारियों के लिए उपयोगी पूरक उपचार के रूप में तेजी से पहचाना जा रहा है। कोरोना वायरस के खिलाफ प्राकृतिक उपचार की तलाश में बड़ी संख्या में उपचार का संग्रह हुआ है, जिन्हे कोविड-19 के इलाज़ के लिए सुझाया जा सकता है। दुनिया भर में लगभग 219 पौधों में एंटीवायरल की तत्व मौजूदगी पाई गई ताकि उन फाइटोकोंस्टीटूएंट्स की पहचान की जा सके, जो कोरोना वायरस संक्रमण में कारगर हो सकती हैं।
जामिया हमदर्द के सहायक प्रोफेसर डॉ आर पी देवांगन ने, हर्बल दवाइयों के गुणवत्ता नियंत्रण में आधुनिक तकनीक पर बोलते हुए कहा कि हर्बल दवाइयों और दवा उत्पादों पर गुणवत्ता नियंत्रण आवश्यक है। प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ अब हमारे पास एचपीएलसी, एचपीटीएलसी, एलसी-एमएस, मास स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री आदि जैसी तकनीक हैं जिनका इस उद्देश्य के लिए कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता हैं। एनबीआरआई , लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ बी एन सिंह बोले, हर्बल नैनोबायोटेक्नोलॉजी अभिनय और उन्नत उत्पादों के विकास के लिए एक उभरता हुआ दृष्टिकोण विषय पर बोलते हुए तकनीक के उपयोग के साथ अधिक कुशल हर्बल फार्मूलेशन के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कोरोना वायरस संक्रमण में नैनो तकनीक का उल्लेखनीय योगदान हैं इसके इस्तेमाल से हर्बल दवाइयों की दक्षता बढ़ेगी।
अमेरिका के टेक्सास यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ शोध सहयोगी सुश्री मोनिका द्विवेदी ने स्वास्थ्य देखभाल में फाइटोनैनोमेडिसिन की उभरती भूमिका पर बोलते हुए कहा हाल के वर्षों में प्लांट सिस्टम फाइटो नैनो टेक्नोलॉजी ने अधिक ध्यान आकर्षित किया है। पौधों के लिए नैनोसाइंस का अनुप्रयोग बेहतर परिणाम प्रदान कर सकते है। इन नैनोकणों को शक्तिशाली रोगाणुरोधी एजेंटो के रूप में खोजा गया है। जामिया हमदर्द के सहायक प्रोफेसर डॉ आर पी देवांगन बोले, हर्बल दवाइयों के गुणवत्ता नियंत्रण में आधुनिक तकनीक पर बोलते हुए कहा कि हर्बल दवाइयों और दवा उत्पादों पर गुणवत्ता नियंत्रण आवश्यक है। प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ अब हमारे पास एचपीएलसी, एचपीटीएलसी, एलसी-एमएस, मास स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री आदि जैसी तकनीक हैं, जिनका इस उद्देश्य के लिए कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता हैं। इमामी हेल्थ केयर कोलकाता के महाप्रबंधक डॉ. सुनील कुमार दुबे ने फाइटोकेमिकल्स का फार्माकोकाइनेटिक और फार्माकोडायनेमिक मॉडलिंग पर विस्तार से प्रकाश डाला अंत में प्रो. वर्मा बोले मौजूदा समय में हम बहुत ही कठिन दौर से गुजर रहे हैं। इस महामारी ने हमारे जीवन को बदल दिया हैं। कोविड-19 के इलाज़ और रोकथाम के लिए आयुष चिकित्सा उपयोगी साबित हुई हैं।


























