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सावधान संकट मे धरती: आसमान से आ रहा है भयानक सौर तूफान, दुनियाभर से जा सकती है…

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के संकट से जूझ रही पूरी दुनिया के सामने अब एक और बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। यदि वास्तव में यह घटना घटती है तो हमारी धरती खतरे में पड़ सकती है। आज दुनियाभर में बिजली गुल हो सकती है और मोबाइल, टीवी, रेडियो आदि तमाम इलेक्ट्रोनिक उपकरण काम करना बंद कर देंगे। ऐसे में इस प्राकृतिक घटना को लेकर पूरी दुनिया के वैज्ञानिक भी चिंतित हैं।

सूरज की सतह से उठा भयंकर सौर तूफान (Solar Storm) 16 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है. अंदेशा जताया जा रहा है कि ये तूफान किसी भी समय पृथ्वी (Earth) से टकरा सकता है,जिसकी वजह से दुनियाभर की बिजली गुल हो सकती है.आज आपके टीवी-रेडियो या मोबाइल फोन में रुकावट आ सकती है . वैज्ञानिकों का अंदेशा है कि यह सौर तूफान सोमवार को किसी भी समय पृथ्वी से टकरा सकता है.किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए वैज्ञानिकों ने अलर्ट जारी किया है। वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट सिग्नलों और विमानों की उड़ानों को लेकर चेतावनी जारी की है।

सैटेलाइट सिग्नल पड़ जाएंगे ठप

नासा ने बताया है कि यह शक्तिशाली भीषण सौर तूफान यदि पृथ्वी की सतह सेतूफान टकराता है तो धरती के हर शहर में बिजली गुल हो सकती है। इतना ही नहीं, पावर लाइंस में करंट की क्षमता भी बढ़ सकती है, जिससे ट्रांसफार्मर्स या अन्य उपकरण ब्लास्ट हो सकते हैं।इस टकराव की वजह से जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है ,बहीं रेडियो सिग्नल, कम्यूनिकेशन और मौसम पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है. इतना ही नहीं, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभुत्व वाले अंतरिक्ष के एक क्षेत्र में इस तूफान का काफी प्रभाव देखने को मिल सकता है.

धरती का बाहरी वायुमंडल हो सकता है गर्म
इससे धरती का बाहरी वायुमंडल गर्म हो सकता है हालांकि आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है.

पहले भी आ चुका है ऐसा महातूफान ,1582 में आया था महातूफान
आपको बता दें कि इससे पहले भी आसमान से ऐसा महातूफान आ चुका है। 1582 में ऐसा ही एक तूफान आया था, जिससे लोगों को लगा था कि दुनिया अब खत्म हो जाएगी। पुर्तगाल के लेखक सोआरेस ने लिखा है, ‘उत्‍तरी आसमान में हर तरफ तीन रातों तक बस आग ही आग दिखाई दे रही थी,आकाश का हर हिस्‍सा ऐसा लग रहा था जैसे मानो आग की लपटों में तब्‍दील हो गया हो।’ उन्‍होंने लिखा है, ‘मध्‍यरात्रि को किले के ऊपर एक भयानक आग की किरणें उभरकर सामने आईं जो बहुत भयानक और डरावनी थी।

इसके बाद, 1859 में भी जिओमैग्‍नेटिक तूफान आया था। इस तूफान ने यूरोप और अमरीका में टेलिग्राफ नेटवर्क को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। वहीं 1989 में भी ऐसा ही सौर तूफान कनाडा में आया था। इसकी वजह से कनाडा के क्‍यूबेक शहर में 12 घंटे तक बिजली गुल हो गई थी। लाखों लोग घबरा गए थे और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा था।

ये लोग देख पाएंगे ऑरोर

उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर दिखेगी तेज रौशनी वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सौर तूफान की वजह से पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर रहने वाले लोगों को रात में सुंदर अरोरा (बेहद चमकीली रोशनी) दिख सकता है। इस सौर तूफान के खतरे को देखते हुए अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने भी चेतावनी जारी की है।

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