टीएमयू के फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन की ओर से एफडीपी का शुभारम्भ
पीजीडीएबी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. फूलचंद ने कहा, कोरोना महामारी के चलते विश्व की अर्थव्यवस्था बेपटरी हो गई। किस प्रकार उद्यमियों ने महामारी के चलते संघर्ष किया? किस प्रकार से काला बाजारियों ने अपने बैंक बैलेंस बना लिए? विश्व में हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूपों से कैसे समाधान निकालें जाए? आदि प्रश्नों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। यही नहीं, इस विषम समय में भारत की अर्थव्यवस्था कितनी प्रभावित हुई आदि ज्वलंत मुद्दों पर अपना शैक्षिक व्याख्यान दिया। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन की ओर से वर्तमान संदर्भ में शिक्षा के विभिन्न आयामों पर आयोजित सात दिनी वर्चुअली फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम-एफडीपी में बोल रहे थे। इससे पूर्व आदिनाथ कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ. रत्नेश जैन ने सभी का स्वागत करते हुए एफडीपी का शंखनाद किया।
टीएमयू के छात्र कल्याण निदेशक प्रो. एमपी सिंह नई शिक्षा नीति- 2020 पर बोले, नई शिक्षा नीति से राष्ट्र की नींव मजबूत बना होगी। एनईपी का अध्ययन और गंभीर मंथन प्रत्येक शैक्षिक समाज के लिए अति आवश्यक है। प्रो. सिंह बोले, मानवीय संसाधनों का अभिप्राय संगठन की श्रमशक्ति के ज्ञान, कौशल, योग्यताओं, मूल्यों, अभिरुचियों और विश्वास से है। मिनरवा इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की डॉ. सुरभि सिंह ने कहा, मानव संसाधन विकास एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए कर्मचारियों की निरन्तर नियोजित तरीके से सहायता की जाए ताकि वे अपने वर्तमान और भावी कार्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक योग्यताओं को हासिल कर सकें। किसी भी देश की आर्थिक प्रगति और उन्नति का आधार उस देश का मानव संसाधन है।
न्यू एरा कॉलेज, गाजियाबाद की डॉ. अनीता शर्मा ने आइडियाज ऑफ़ डवलपमेंट, नॉलिज लर्निंग एंड टीचिंग थ्रू लेसन प्लान पर चर्चा करते हुए बोलीं, किस प्रकार अधिगम और शिक्षण को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं ? छात्रों को व्यावहारिक आधार पर सीखने को प्रोत्साहित करना चाहिए। शिक्षकों को पाठ्यक्रम सामग्री को वास्तविक संसार के अनुप्रयोगों से संबंधित बनाकर प्रस्तुत करना चाहिए। फैकल्टी ऑफ एजुकेशन की प्राचार्या प्रो.रश्मि मेहरोत्रा ने कहा, यह एफडीपी भारतीय ज्ञान तंत्र की समकालीन शिक्षा और अभ्यास पर आधारित है। नई शिक्षा नीति शिक्षाविदों की महत्वाक्षाओं के अनुकूल है, जो पुराने शिक्षा तंत्र को रूपांतरित करना चाहते हैं। भारत प्रतिभाओं और संसाधनों से भरपूर है, लेकिन इसका उपयोग करने के लिए एक मजबूत और अच्छे शिक्षा तंत्र की आवश्यकता है। अंत में उन्होंने अतिथियों समेत सभी का शुक्रिया अदा किया। इस मौके डॉ. नम्रता जैन, एआर श्री दीपक मलिक, श्री विनय कुमार, श्री धर्मेंद्र सिंह, साजिया सुल्तान, डॉ. सुगंधा जैन, पायल शर्मा, नाहिद बी, श्री सुशील लोधी, श्री हेमंत सिंह आदि उपस्थित रहे।


























