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बौद्धिक सम्पदा का रजिस्ट्रेशन बेहद जरुरी : तुषार
टीएमयू के एफओईसीएस में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी मैनेजमेंट पर वर्कशॉप

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज – एफओईसीएस में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी मैनेजमेंट पर आयोजित वर्कशॉप में बेल सर्टिफाइड आईपी प्रोफेशनल एंड रजिस्टर्ड पेटेंट एजेंट, इंडिया श्री कुमार तुषार श्रीवास्तव ने बतौर मुख्य अतिथि बताया, हमें अपनी बौद्धिक सम्पदा का रजिस्ट्रेशन कराना बहुत जरुरी होता है क्योंकि हमारी मेहनत और बौद्धिक सम्पदा का दुरुपयोग कोई और न कर सके। इसीलिए शिक्षकों के संग-संग स्टुडेंट्स को भी बौद्धिक सम्पदा अधिकार-आईपीआर के बारे में जानना चाहिए। उन्होंने भारत के अंदर बौद्धिक सम्पदा को किस तरह सुरक्षित किया सकता उसके बारे में विस्तार से बताया। बोले, भारत के अलावा यूएस, कनाडा और यूरोपियन यूनियन में पेटेंट कराने से हमारा अपनी बौद्धिक सम्पदा पर अधिकार विश्व स्तर पर सुरक्षित हो जाता है, क्योंकि इन सभी देशों की पेटेंट रिपोजिटरी एक-दूसरे से जुडी हुई हैं। श्री श्रीवास्तव ने कोडैक और ब्लैकबेरी जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए बताया, जिन बड़ी कंपनियों ने पेटेंट पर ध्यान नहीं दिया, उन्हें आज बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस कारण से बहुत सी कंपनियां विश्व बाजार से ग़ायब हो गईं। इससे पूर्व बेल सर्टिफाइड आईपी प्रोफेशनल एंड रजिस्टर्ड पेटेंट एजेंट, इंडिया श्री कुमार तुषार श्रीवास्तव, एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी, एचओडी डॉ. अशेंद्र कुमार सक्सेना, श्री आशीष बिश्नोई और श्री राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके वर्कशॉप का शुभारम्भ किया। मुख्य अतिथि का बुके देकर स्वागत किया गया। अंत में मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। संचालन प्रेरणा जैन और अतिशा जैन किया।

रिसोर्स पर्सन श्री श्रीवास्तव ने बताया, पेटेंट का आवेदन कैसे और कहां करें। इन्नोवेशन का स्कोप हमेशा बना रहता है। बोले, आप जो इंवेंट करें, उसे सुरक्षित भी रखें। बौद्धिक सम्पदा क्या है। उन्होंने विभिन्न तरह के बौद्धिक सम्पदा अधिकारों- पेटेंट, कॉपी राइट्स, डिज़ाइन, ट्रेड मार्क, ट्रेड सीक्रेट और ज्योग्राफिकल इंडिकेशन के बारे में भी जानकारी दी। नावेल्टी, यूटिलिटी और इन्वेन्टिव स्टेप के आधार पर गवर्नमेंट पेटेंट ग्रांट करती है। उन्होंने पेटेंट से जुडी भ्रांतियों को भी दूर किया। सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्लीकेशन भी पेटेंट के योग्य हैं। प्रोडक्ट के साथ-साथ प्रोसेस का भी पेटेंट कराया जा सकता है। अगर कई लोग मिलकर साथ पेटेंट कराते हैं तो उनके नाम का क्रम मायने नहीं रखता। पेटेंट साइकिल- इन्वेशन, इवैल्यूएशन, ड्राफ्टिंग, फाइलिंग, प्रॉसिक्यूशन, ग्रांट और कॉमर्शियलाइज़ेशन के बारे में विस्तार से चर्चा की। एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने बताया, भारत पेटेंट्स, कॉपी राइट्स, ट्रेड मार्क्स और ट्रेड सीक्रेट्स के क्षेत्र में आज तेजी से आगे बढ़ रहा है। पेटेंट के मामले में चीन विश्व में सबसे आगे है जबकि भारत के पास आइडियाज विश्व में सबसे अधिक हैं। इस वर्कशॉप का उद्देश्य बौद्धिक सम्पदा के अधिकारों और पेटेंट्स के बारे में जानकारी देना है। इस मौके पर डॉ. शम्भू भारद्वाज, प्रो. आरसी त्रिपाठी, डॉ. संदीप वर्मा, डॉ. शक्ति कुंडु, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. अर्पित जैन, डॉ. अशोक कुमार, श्री रूपल गुप्ता, श्रीमती नीरज कुमारी, श्री ज्योति रंजन लाभ, श्री अभिलाष कुमार, श्रीमती अनु शर्मा आदि मौजूद रहे।

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