टीएमयू के कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंसेज, फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन और कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग में सीटीएलडी की ओर से आउटकम बेस्ड एजुकेशन पर एक-एक दिन प्रशिक्षण
खास बातें
उच्च शिक्षा को मिलेंगे ओबीई से नए पंख : प्रो. कृष्णिया
एनईपी से होंगे आमूल-चूल बदलाव : निदेशक प्रो. सिंह
नर्सिंग कोर्स में बरसों से है ओबीई लागू : प्रो. कुलकर्णी
मास्टर ट्रेनर अरोरा बोले, ओबीई से बदलेगी तस्वीर
सीटीएलडी कोऑर्डिनेटर वार्ष्णेय बोले, एक्स-रे के मानिंद
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के सीटीएलडी डायरेक्टर प्रो. आरएन कृष्णिया ने उच्च शिक्षा में ओबीई-आउटकम बेस्ड एजुकेशन को वरदान बताते हुए कहा, नॉलेज के संग-संग स्किल और बिहेव्यर भी अनिवार्य है। उन्होंने ओबीई को एनईपी का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा, इससे नई शिक्षा प्रणाली-एनईपी को ऊँची उड़ान मिलेगी। वह सीटीएलडी की ओर से कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंसेज, फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन और कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग कॉलेजों में आउटकम बेस्ड एजुकेशन-ओबीई की एक-एक दिनी ट्रेनिंग प्रोग्राम ने बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। सीटीएलडी के डायरेक्टर प्रो. कृष्णिया ने उम्मीद जताई, ओबीई ट्रेनिंग सभी टीचर्स और छात्र-छात्राओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने ट्रेनिंग में मौजूद तीनों कॉलेजों की फैकल्टी से कहा, वे इस विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम के उल्लेखित बिंदुओं को आत्मसात करें ताकि खुद के साथ-साथ स्टुडेंट्स के सर्वागीण विकास और तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी बुलंदी के नए आयाम छुएगी। इस मौके पर निदेशक छात्र कल्याण प्रो. एमपी सिंह, कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग के प्रिंसिपल प्रो. एसके कुलकर्णी, वाइस प्रिंसिपल प्रो. जेसलीन एम, तीनों कॉलेजों के 100 से अधिक टीचर्स मौजूद रहे। ट्रेनिंग के दौरान सीटीएलडी के ट्रेनर्स- श्री तरुण अरोरा, कोऑर्डिनेटर श्री दिलीप वार्ष्णेय, श्री अभिनव श्रीवास्तव की मौजूदगी उल्लेखनीय रही। संचालन सीटीएलडी की सीनियर फैकल्टी मिस जैस्मिन स्टीफन ने किया। यह ट्रेनिंग पीपीटी के जरिए दी गई।
कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंसेज और फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन में सीटीएलडी के मास्टर ट्रेनर श्री तरुण अरोरा ने कहा, ओबीई को ईंमानदारी से लागू करें तो उच्च शिक्षा की तस्वीर और तकदीर दोनों में आमूल-चूल परिवर्तन होगा। शिक्षा पद्धति के नए आयाम आउटकम बेस्ड एजुकेशन -ओबीई पर प्रकाश डालते हुए बोले, दरअसल ओबीई हमारी परम्परागत शिक्षा प्रणाली के लिए रामबाण साबित होगी। पुरानी शिक्षा प्रणाली की तमाम खामियों को उखाड़ फेंकेंगी। इससे पूर्व टीचर्स को सम्बोधित करते हुए निदेशक छात्र कल्याण प्रो. सिंह ने नई शिक्षा प्रणाली को वरदान बताते हुए कहा, नई शिक्षा प्रणाली से उच्च शिक्षा की दिशा और दशा दोनों बदल जाएंगी। प्रो. सिंह ने ओबीई को वैक्सीनेशन की संज्ञा देते हुए कहा, इससे शिक्षा तंत्र में व्याप्त खामियां दूर होंगी। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी एनईपी के क्रियान्वयन के प्रति प्रतिबद्ध है।
कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग में कोऑर्डिनेटर श्री दिलीप वार्ष्णेय बोले, ओबीई के तीन महत्वपूर्ण स्टेप होते हैं। सबसे पहले प्रोग्राम एजुकेशनल ऑब्जेक्टिव होता है। इससे किसी भी स्टुडेंट्स के न केवल मौजूदा स्तर बल्कि भविष्य के लक्ष्य का भी मूल्यांकन होता है। इसके बाद प्रोग्राम आउटकम के तहत किसी भी छात्र के स्किल्स का स्तर जांचा जाता है। अंत में कोर्स आउटकम के तहत छात्र के सब्जेक्ट की लर्निंग का मूल्यांकन होता है। इन स्टेप्स के मूल्यांकन के बाद किसी भी छात्र और छात्राओं की क़ाबिलियत को जांचा जा सकता है। श्री वार्ष्णेय ने इन तीनों बिन्दुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। इससे पूर्व कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग के प्रिंसिपल प्रो. एसके कुलकर्णी ने कहा, नर्सिंग एक इकलौता कॉलेज है, जिससे ओबीई बरसों-बरस से लागू है। प्रो. कुलकर्णी बोले, दुनिया के हर शिक्षक को ब्लूम्स टैक्सोनोमी का अनुसरण करना चाहिए। सीटीएलडी मास्टर ट्रेनर श्री अभिनव श्रीवास्तव ने बीच-बीच में सवालों के जवाबों में कहा, यदि आप ट्रेनिंग को ईमानदारी से अंगीकार करेंगे तो ओबीई के महत्वपूर्ण टूल्स- नॉलेज, स्किल और बिहेव्यर के जरिए उम्दा मेंटर साबित होंगे। इसमें स्टुडेंट्स भी सेल्फ लर्निंग की दिशा में प्रेरित होंगे। सीटी या किसी भी परीक्षा की कॉपी जांचते वक्त परीक्षक को उसकी कमजोरियों को तलाशना होगा और फिर ओबीई के तहत तराशना होगा।


























