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कोरोना का टीका लगवाना न लगवाना ऐच्छिक होगा सरकार किसी पर वैक्सीन लेने के लिए दबाव नहीं बनाएगी

विभोर पाराशर की रिपोर्ट

मंत्रालय ने गुरुवार रात को कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े कई सवालों और उनके जवाब की एक लिस्ट सार्वजनिक की.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्वदेश केसरी को बताया है कि भारत में जनवरी महीने से कोरोना के टीके लगने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.

टीकाकारण योजना के तहत अगस्त महीने तक 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जाएगा

भारत में कोरोना संक्रमण हुआ एक करोड़ के पार

वैक्सीन लगने के बाद भी मास्क पहनने, फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने और हाथ धोने जैसी सावधानियों का पूरा ध्यान रखना होगा

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्वदेश केसरी को बताया है कि भारत में जनवरी महीने से कोरोना के टीके लगने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.
नाम ज़ाहिर न किए जाने की की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि आने वाले कुछ हफ़्तों में वैक्सीन बनाने वाली कुछ कंपनियों को देश की दवा नियामक संस्था से वैक्सीन के अपातकालीन इस्तेमाल की इजाज़त मिल सकती है.दो कंपनियों ने पहले ही वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की अर्ज़ी दे दी है और छह अन्य कंपनियाँ, वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के दौर में हैं.टीकाकारण योजना के तहत अगस्त महीने तक 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जाएगा.
भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण के कुल मामले एक करोड़ के पार और बीमारी की चपेट में आकर अब तक लगभग एक लाख 44 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.हालाँकि अब भारत में संक्रमण के नए मामलों में गिरावट आई है लेकिन ऐसे वक़्त में भी टीकाकरण की प्रक्रिया क्या होगी और ये किसे पहले मिलेगी इसकी विस्तृत योजना तैयार की गई है.
कौन सी वैक्सीनों के नाम पर है चर्चा?
भारत के सीरम इंस्टीट्यूट और ब्रितानी फ़ार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राज़ेनेका के सहयोग से बनी कोविशील्ड वैक्सीन और कोवैक्सीन, जिसे भारत बायोटेक और आईसीएमआर ने बनाया है, की ख़ूब चर्चा है.दोनों ही वैक्सीन कंपनियों ने आपातकालीन इस्तेमाल के लिए आवेदन किया है.

  • वैक्सीन्स जो अभी ट्रायल के दौर में हैं:
  • ज़ाईकोव-डी. इसे अहमदाबाद की कंपनी ज़ाइडस कैडिला बना रही है.
  • हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल ई, एमआईटी के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार कर रही है.
  • -HGCO19, पुणे की कंपनी जेनोवा, सिएटल की कंपनी एचडीटी बायोटेक कॉपरेशन के साथ मिलकर भारत की पहली mRNA वैक्सीन बना रही है.
  • -भारत बायोटेक की नज़ल वैक्सीन.
  • रूस के जेमेलिया नेशनल सेंटर और डॉक्टर रेड्डी लैब की ओर से तैयार की गई स्पुतनिक वी वैक्सीन.
  • अमरीका की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी नोवावाक्स और सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से तैयार की गई दूसरी वैक्सीन
  • ‘भारत में वैक्सीन का संतोषजनक स्टॉक उपलब्ध’
  • स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि इनमें से चार वैक्सीन पूरी तरह स्वदेशी हैं.आधिकारी ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज़ भी किया जिनमें दावा किया जा रहा है कि भारत ने दुनिया भर की वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को लाखों ख़ुराकों का प्री-ऑर्डर दे दिया है.उनका कहना था कि भारत में वैक्सीन का स्टॉक ‘संतोषजनक मात्रा’ में उपलब्ध है.अधिकारी ने यह भी बताया कि भारत सरकार कुछ स्थानीय और वैश्विक वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के संपर्क में थी ताकि उन्हें अपनी ज़रूरतें बताई जा सकें और उनकी उत्पादन की क्षमता के बारे में जाना जा सके.उन्होंने कहा, ”सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक इन दो कंपनियों के पास मिलाकर एक महीने में 6.5 करोड़ ख़ुराक वैक्सीन बनाने की क्षमता है. अगर वैक्सीन कंपनियों को इजाज़त मिल जाती है तो भारत के पास वैक्सीन का बेहतर स्टॉक है.’’
  • वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने की योजना क्या है?
  • अधिकारी ने बताया कि अगले साल जनवरी से अगस्त महीने तक लगभग 30 करोड़ लोगों को कोरोना के टीके लगाए जाएंगे.
  • इस प्रक्रिया में एक करोड़ स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल होंगे, जिनमें पुलिसकर्मियों और नगर निगम के कर्मचारियों सहित फ्रंट लाइन पर काम करने वाले लोग शामिल होंगे.
  • इसके बाद उन लोगों तक टीका पहुँचाया जाएगा जिनकी उम्र 50 साल से ज़्यादा है या जिन्हें दूसरी कई बीमारियाँ (को-मॉर्बिडिटीज़) हैं.
  • भारत पहले से ही लगभग चार करोड़ गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को 12 तरह की बीमारियों से बचाने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी टीकाकरण योजना चलाता है. भारत के पास ऐसे वैक्सीन को स्टोर करने की भी बेहतर क्षमता है.

अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार भारत में कुल दो लाख 23 हज़ार नर्सें और दाइयों में से एक लाख 54 हज़ार नर्सों और दाइयों को इस योजना में शामिल किया जाएगा.ये नर्सें और दाइयाँ कोरोना वैक्सीन को लोगों तक पहुँचाएंगी. इसके अलावा नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले आख़िरी साल के छात्रों को भी वॉलिंटयरशिप लिए आमंत्रित किया जाएगा.

वैक्सीन के साइड इफ़ेक्ट से कैसे निबटेगी सरकार?

  • मौजूदा 29 हज़ार कोल्ड-स्टोरेज को वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा क्योंकि ये वैक्सीन 2 डिग्री सेल्सियस से लेकर 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में ही रखी और वितरित की जा सकती हैं.
  • ऐसे में वैक्सीन के लिए एक कोल्ड-चेन बनानी होगा.
  • स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि भारत में -80 डिग्री तक के बेहद ठंडे कोल्ड-स्टोरेज भी उपलब्ध हैं, जो हरियाणा के पशु चिकित्सा और कृषि से जुड़े रिसर्च सेंटर में बनाए गए हैं.

एक बड़ा सवाल यह भी है कि जिन लोगों को वैक्सीन दी जाएगी उसके बाद उन पर पड़ने वाले असर को कैसे सरकार मॉनिटर करेगी?

  • ये सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन का इस्तेमाल करने के बाद एक वॉलंटियर ने यह दावा करते हुए कंपनी पर मुक़दमा दायर किया कि वैक्सीन लेने के बाद उनकी तबीयत ख़राब हो गई.
  • इसके जवाब में अधिकारी ने कहा, ”हमें पारदर्शी होना होगा और ऐसे साइड इफ़ेक्ट्स जैसे मामलों से सही तरीके से निपटना होगा. इसके लिए एक योजना तैयार भी की गई है. ”

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वैक्सीन से जुड़े कई अहम सवालों का जवाब दिया है.

मंत्रालय ने कहा है कि कोरोना का टीका लगवाना ऐच्छिक होगा. यानी सरकार किसी पर वैक्सीन लेने के लिए दबाव नहीं बनाएगी और टीका लगवाना या न लगवाना व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करेगा.स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये भी कहा कि भारत में उपलब्ध कोरोना वैक्सीन दूसरे देशों में विकसित की गई वैक्सीन जितना ही प्रभावी होगी.मंत्रालय ने गुरुवार रात को कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े कई सवालों और उनके जवाब की एक लिस्ट सार्वजनिक की.इस लिस्ट में वैक्सीन से जुड़ी ऐसी शंकाओं का समाधान करने की कोशिश की गई है, जो इस वक़्त ज़्यादातर लोगों के ज़हन में हैं:

वैक्सीन का असर कितने दिनों में होता है?

  • मंत्रालय ने इसके जवाब में बताया है कि आम तौर पर कोरोना की एंटीबॉडी विकसित करने में शरीर को वैक्सीन की दो खुराक की ज़रूरत होती है.

क्या वैक्सीन सुरक्षित होगी?

  • स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि वैक्सीन सभी लोगों के लिए सुरक्षित हो, इसका ध्यान रखते हुए भारत की ड्रग कंट्रोलर संस्था वैक्सीन को तभी मंज़ूरी देगी जब वो सुरक्षा और प्रभाव के मानकों पर खरी उतरेगी.

क्या कैंसर, डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के मरीज़ वैक्सीन ले सकते हैं?

  • मंत्रालय ने इस सवाल का जवाब ‘हाँ’ में दिया है.

क्या वैक्सीन सबको एकसाथ मिलेगी?

  • यह वैक्सीन की उपलब्धता पर निर्भर करेगा. वैक्सीन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, फ़्रंटलाइन पर काम करने वालों, बुजुर्गों और दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी.

वैक्सीन लेने के बाद क्या सावधानियाँ बरती जाएँ?

  • मंत्रालय ने अपने सुझाव में कहा है कि टीका लगने के बाद लोगों को स्वास्थ्य केंद्र पर कम से कम आधे घंटे आराम करना चाहिए.मंत्रालय ने कहा, “टीका लगने के बाद अगर आपको किसी भी तरह की दिक्कत महसूस होती है तो आप नज़दीक के स्वास्थ्य अधिकारियों, डॉक्टर, एएनएम या आशा कार्यकर्ता से संपर्क करें.”

वैक्सीन आने के बाद मास्क पहनने की ज़रूरत नहीं होगी?

  • वैक्सीन लगने के बाद भी मास्क पहनने, फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने और हाथ धोने जैसी सावधानियों का पूरा ध्यान रखना होगा.

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