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बदायूँ के कवि कुलदीप अंगार का “हिन्दी साहित्य भारती” की केन्द्रीय (अन्तर्राष्ट्रीय) कार्यकारिणी में स्थाई सदस्य के रूप में हुआ मनोयन-शुभचिंतकों,प्रशंसकों में हर्ष की लहर

राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रख्यात साहित्यकार तथा पूर्व शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार डॉ0 रवींद्र शुक्ल ने बदायूँ के कवि कुलदीप अंगार को हिंदी साहित्य भारती (अंतर्राष्ट्रीय) की केंद्रीय कार्यसमिति के परामर्श से केंद्रीय कार्यकारिणी में स्थायी सदस्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। अंगार के केंद्रीय कार्यकारिणी में स्थायी सदस्य बनाये जाने का समाचार से प्रशंसकों व सुभचिन्तकों में खुशी की लहर है,लोग शोशल मीडिया के माध्यम से व घर पहुंच कर वधाई दे रहे हैं।

विदित हो कि हिंदी साहित्य भारती (अंतर्राष्ट्रीय) संस्था देश के अनेक विद्वानों के सम्मिलित प्रयास से गठन की गई है।
हिंदी साहित्य भारती से अब तक अनेक पूर्व राज्यपाल, विविध विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध साहित्यकारों सहित कई नवोदित साहित्यकार तथा हिन्दीप्रेमी जुड़ चुके हैं।
हिंदी साहित्यभारती के प्रमुख उद्देश्यों में भारत के गौरवशाली साहित्य एवं सांस्कृतिक चेतना को विश्व पटल पर प्रतिष्ठा दिलाना, भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार दिलाना, वैश्विक स्तर पर हिंदी तथा उसकी सहायक बोलियों की महत्ता स्थापित करने हेतु विविध कार्यक्रम आयोजित करना, आर्थिक रूप से कमज़ोर साहित्यकारों की उच्च स्तरीय कृतियों को प्रकाशित कराने की व्यवस्था करना आदि हैं।
हिंदी साहित्यभारती द्वारा उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु वर्तमान में निम्नलिखित कार्यक्रम गतिमान हैं-
1- “राष्ट्रवन्दन अतीत का अभिनंदन” कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसे महान साहित्यकारों पर गोष्ठियाँ आयोजित की जाती हैं जिनके साहित्यिक कार्यों का उतना प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया जिसके वे अधिकारी थे।
2- “राष्ट्रवन्दन वर्तमान का अभिनंदन” कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसे श्रेष्ठ साहित्यकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व का विवेचन किया जाता है, जो वर्तमान समय में समाज और राष्ट्रहित में साहित्यसृजन कर रहे हैं।
3- भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार दिलाने के आग्रह के लिये महामहिम राष्ट्रपति जी के नाम ऑनलाईन तथा ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से पत्र लेखन अभियान गतिमान है।
हिंदी साहित्यभारती (अंतर्राष्ट्रीय) इस समय 32 देशों में अपना सांगठनिक स्वरूप तैयार करके सतत क्रियाशील है। जहाँ जगद्गुरु राजराजेश्वरानंद, कनखल (हरिद्वार), तथा पूज्य स्वामी डॉ0 शाश्वतानंद गिरी जी जैसे सन्त इसके मार्गदर्शक मण्डल की शोभा बढ़ा रहे हैं, वहीं डॉ0 रवींद्र शुक्ल, पूर्व शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार केंद्रीय अध्यक्ष, डॉ0 बुद्धिनाथ मिश्र वरिष्ठ साहित्यकार केंद्रीय उपाध्यक्ष तथा डॉ0 अनिल शर्मा प्रख्यात साहित्यकार, केंद्रीय महामंत्री के रूप में इसकी शोभा बढ़ा रहे हैं।

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