- डॉ उर्मिलेश के कृतित्व पर आधारित संकलन को संजोया है उनकी पुत्री सम्पादक कवयित्री सोनरूपा विशाल ने
- इस संग्रह में 29 विद्वानों और समीक्षकों के आलेख, शामिल,
- संकलन में डॉ. उर्मिलेश के हिन्दी ग़ज़ल पर शोध परक आलेख,उनकी आत्मकथा सहित कई ग़ज़लें व शेर हैं शामिल,
- संग्रह में उनके रचनाकर्म पर पुरानी और नई पीढ़ी की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ भी हैं शामिल।
लखनऊ । हिन्दी गजल हिन्दी साहित्य की एक नई विधा है। नई विधा इसलिए है, क्योंकि गजल मूलत फारसी की काव्य विधा है। फारसी से यह उर्दू में आई। गजल उर्दू भाषा की आत्मा है। गजल का अर्थ है प्रेमी-प्रेमिका का वार्तालाप। आरंभ में गजल प्रेम की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम थी, किन्तु समय बीतने के साथ-साथ इसमें बदलाव आया और प्रेम के अतिरिक्त अन्य विषय भी इसमें सम्मिलित हो गए। आज हिन्दी गजल ने अपनी पहचान बना ली है। हिन्दी गजल को शिखर तक पहुंचाने में समकालीन कवि डॉ उर्मिलेश की भूमिका सराहनीय रही है। वे उर्मिलेश ही हैं, जिन्होंने हिन्दी गजल को विशेष पहचान दिलाई।
बदायूँ के अन्तराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात कवि,ग़ज़लकार डॉ उर्मिलेश के कृतित्व पर आधारित 375 पेज का एक संग्रह जिसमें 29 विद्वानों और समीक्षकों के आलेखों के साथ-साथ डॉ. उर्मिलेश के हिन्दी ग़ज़ल पर शोध परक आलेख एवं उनका आत्मकथ्य सहित कई ग़ज़लें व शेर को एक सूत्र में पिरोया है उनकी पुत्री,कवियत्री सोनरूपा विशाल ने इस संग्रह में डॉ उर्मिलेश के रचनाकर्म पर पुरानी और नई पीढ़ी की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ भी शामिल हैं।सोनरूपा ने इस संग्रह को ‘डॉ.उर्मिलेश और हिन्दी ग़ज़ल’ नाम दिया है जिसका संपादन उन्होंने स्वयं किया है ।अपने पिता की तरह अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर कवियत्री के रूप में पहचान बना चुकी सोनरूपा विशाल ने गत दिवस लखनऊ में उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री श्री दिनेश शर्मा जी से भेंट कर इस संग्रह की प्रथम प्रति भेंट की।
साहित्य प्रेमी श्री दिनेश शर्मा भी डॉ उर्मिलेश की कविताओं के प्रशंसक रहे हैं, संग्रह के लिये उन्होंने सोनरूपा विशाल को वधाई देते हुए कहा कि ये संग्रह शोधार्थियों तक पहुँचे इसके लिए वे हर सम्भव प्रयास करेंगे।
सोनरूपा विशाल ने स्वदेश केसरी से बात करते हुए बताया कि समकालीन ग़ज़ल के सर्वाधिक सक्रिय-सार्थक ग़ज़लकारों की अग्र पँक्ति में डॉ उर्मिलेश के नाम का उल्लेख किया जाता है और हिन्दी ग़ज़ल की यात्रा,परम्परा और विकास का अगर अध्ययन करना है तो डॉ उर्मिलेश को पढ़े बिना ये अधूरा रहेगा इसीलिए हिन्दी ग़ज़ल के प्रतिनिधि ग़ज़लकारों में प्रारम्भिक स्थान रखने वाले डॉ. उर्मिलेश का श्रम नमनीय है। ये संकलन उनके इसी अवदान के सम्मान में एक प्रयास है।
इस वृहद संकलन के प्रेरक श्रधेय वरिष्ठ ग़ज़लकार श्री हरेराम समीप हैं, इस ग्रन्थ का सम्पादन उन्होंने स्वयं किया है।ये किताब हिन्दी ग़ज़ल पर होने वाले शोध कार्यों के लिए एवं ग़ज़ल से सरोकार रखने वाले पाठकों द्वारा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होगी।



























