तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के एनाटॉमी विभाग की नेशनल ई-कांफ्रेंस में वर्चुअल वर्सस एक्सप्लेसिट अपॉर्च्युनिटीज़ एंड चैलेंजेज पर हुआ मंथन, एवीईओकॉन-2021 में एम्स, जिपमर, लेडी हार्डिंग, ग्रांट्स मेडिकल कॉलेज समेत 200 देश के प्रमुख संस्थानों ने की शिरकत
- डिजिटल युग में दिमाग का भी भरपूर करें इस्तेमाल : डॉ. अग्निहोत्री
- ऑनलाइन लर्निंग एज सेल्फ बेस्ड लर्निंग पर बोले डॉ. रमेश बाबू
- क्विज़ – हिस्ट्री ऑफ़ एनाटॉमी में 400 शिक्षाविदों ने किया प्रतिभाग
- ई-कांफ्रेंस के समापन सत्रों में भी सौ और प्रस्तुत किए गए शोधपत्र
- टीएमयू के प्रथम वर्ष के स्टुडेंट्स ने भी किए रिसर्च पेपर्स प्रेजेंट
- रिसर्च पेपर्स को चेयरपर्सन्स ने अपनी कसौटी पर परखा
हिम्स मेडिकल कॉलेज, देहरादून की प्रोफेसर डॉ. दीपा सिंह ने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम पर व्याख्यान देते हुए मेडिकल स्टुडेंट्स को डिजिटल और वास्तविक लर्निंग पैटर्न के बीच सामंजस्य बैठाने को लेकर तमाम टिप्स दिए जबकि गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अमृतसर के डॉ. गौरव अग्निहोत्री ने ऑनलाइन एक्सटेंशन ऑफ़ ह्यूमन ब्रेन एंड डिजिटल एमनेजिया पर बोलते हुए कहा, मौजूदा समय में डिजिटल एड की वजह से हम सभी ने अपने दिमाग का सही इस्तेमाल बंद कर दिया है, क्योंकि किसी भी साधारण से सवाल का जवाब हम गूगल के जरिए जानना चाहते हैं, न कि अपने दिमाग पर जोर डाल कर। उन्होंने सभी से विनम्र अनुरोध किया कि डिजिटल गंगा में इतनी दूर भी न बह जाए कि किनारा भी न मिले। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के एनाटॉमी विभाग की ओर से वर्चुअल वर्सस एक्सप्लेसिट अपॉर्च्युनिटीज़ एंड चैलेंजेज पर आयोजित नेशनल ई-कांफ्रेंस- एवीईओकॉन-2021 के समापन समारोह में मेडिकल शिक्षाविदों ने मंथन किया।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ के डॉ. सी एस रमेश बाबू ने मेडिकल पाठ्यक्रम, कॉर्पोरेट ट्रेनिंग, टेक्निकल टुटोरिअल्स पर प्रकाश डालते कहा, किसी भी डॉक्टर के लिए इन सभी ट्रेनिंग पाठ्यक्रमों में प्रवीण होना चाहिए। ऑनलाइन लर्निंग एज सेल्फ बेस्ड लर्निंग सेशन के चेयरपर्सन श्री रामचंद्र मेडिकल कॉलेज, चेन्नई की प्रोफेसर एवं हेड डॉ. कल्पना रामचंद्रन और ऑटोनोमस मेडिकल कॉलेज, बस्ती के प्रिंसिपल डॉ. नवनीत कुमार चौहान थे जबकि लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम सत्र की चेयरपर्सन एम्स, न्यू दिल्ली की प्रोफेसर डॉ. रेनू ढींगरा और केजीएमसी, लखनऊ की प्रोफेसर डॉ. ज्योति चोपड़ा थीं। केजीएसमसी, लखनऊ की प्रोफेसर एंड हेड डॉ. पुनीता माणिक ने वर्चुअल वर्सस कैडवेरिक डिसेक्शन पर बोलते हुए, आभासी एवं वास्तविक कैडेवर के विच्छेदन में आने वाली समस्याओं और उनके निराकरण पर विस्तार से चर्चा की। इस सत्र के चेयरपर्सन सेंटजोंस मेडिकल कॉलेज, बंगलुरु के डॉ. बालसुब्रमण्यम वी और वीएमएमसी और सफदरजंग हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ. वंदना मेहता थीं।
अंतिम दिन दोनों सत्रों के बीच डिजिटल क्विज-हिस्ट्री ऑफ़ एनाटोमी हुई, जिसमें चार सौ से अधिक शिक्षाविदों ने भाग लिया। साइंसटिफ़िक सेशन में जेनेटिक्स, हिस्ट्रोलॉजी, फोरेंसिक एनाटॉमी, कंपेरेटिव एनाटॉमी, क्लीनिकल इम्ब्रयोलोजी, एनाटोमिकल टेक्निक्स, न्यूरो एनाटॉमी, अन्थ्रोपोमेट्री और ग्रॉस एनाटॉमी पर सौ से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इन शोधपत्रों को सेशन के चेयरपर्सन के जरिए कसौटी पर परखा गया। अंतिम सत्र में टीएमएमसी एंड आरसी के प्रथम वर्ष के छात्रों ने भी रिसर्च पेपर्स प्रेजेंट किए। ई-कांफ्रेंस में निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर, टीएमएमसी एंड आरसी की प्रिंसिपल डॉ. श्यामोली दत्ता, डॉ. दिलशाद अहमद, डॉ. सुप्रीति भटनागर, डॉ. सोनिका शर्मा, डॉ. रश्मि भारद्वाज के अलावा भावी डॉक्टर्स डॉ. सौरभ, डॉ. अलीशा, डॉ. शाहजीन, डॉ. शिखा आदि उपस्थित रहे। अंत में एवीईओकॉन के ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. एसके जैन और डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. निधि शर्मा ने सभी अतिथियों का शुक्रिया अदा किया। ई-कांफ्रेंस एवीईओकॉन-2021 का संचालन डॉ. हिना नफीस ने किया।


























