- होली पर भी नाले में तब्दील सड़क से गुजरने को मजबूर लोग, सब्र टूटा तो मोहल्ले वालों ने उखाड़ दी सड़क,
- चेयरमैन के व्यान पर भड़का गुस्सा -कार्रवाई जनता पर या जिम्मेदारों पर? लोगों ने पूछा तीखा सवाल


बिल्सी।होली जैसा त्योहार का दिन, नए कपड़े, नए जूते और परिवार के साथ खुशियां मनाने की उम्मीद—लेकिन जब उसी दिन लोगों को गंदे नाले के पानी से होकर गुजरना पड़े, तो सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि नरकीय जीवन का बन जाता है। यही हाल बिल्सी के मोहल्ला नंबर 5, वार्ड नंबर 8 के लोगों का है, जहां पिछले एक वर्ष से सड़क नाले में तब्दील हो चुकी है।
मोहल्ला वासी लंबे समय से जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। सड़क पर पानी की निकासी न होने के कारण गंदा पानी पूरे समय भरा रहता है। बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि वे कई बार इस गंभीर समस्या की शिकायत नगर पालिका प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
आज होली जैसे पावन पर्व पर भी जब स्थिति जस की तस रही, तो मोहल्ले वासियों का सब्र का बांध टूट गया। विरोध स्वरूप उन्होंने सड़क की इंटरलॉकिंग ईंटें उखाड़कर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया और ईंटों को सड़क के दोनों ओर लगा दिया। इसके चलते पूरे मोहल्ले का आवागमन ठप हो गया और लोगों को मजबूरी में घूमकर निकलना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क एक साल से नाले के रूप में पड़ी हो, तो ऐसी सड़क का क्या मतलब? त्योहार के दिन भी यदि लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़े, तो यह सीधे तौर पर पालिका प्रशासन की विफलता नहीं तो और क्या है?
इधर इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष पति ओमप्रकाश सागर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जलभराव की समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने सड़क उखाड़ी है, उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इस बयान पर मोहल्ले वासियों ने कड़ा सवाल किया है। लोगों का कहना है कि अगर जनता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है, तो फिर उस नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं, जिसने एक साल से सड़क को नाला बनाकर रखा है? इस लापरवाही के कारण जो लोग रोज़ाना इस नरकीय स्थिति में जीवन जी रहे हैं, उनकी सुध कौन लेगा?
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि वे कानून तोड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन जब बार-बार शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। अब सवाल यह है कि पालिका प्रशासन पहले अपनी जिम्मेदारी निभाएगा या सिर्फ कार्रवाई की धमकी देकर मामले को दबाने की कोशिश करेगा? यह मामला अब सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि जनता के धैर्य, अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही का बन गया है।


























