यूजीसी बना भाजपा के गले की हड्डी! हिंदू सम्मेलन के बाद अब व्यापारियों का भारत बंद समर्थन,…..


बिल्सी (बदायूं)।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) एक्ट 2026 के काले कानून के विरोध में सियासी और सामाजिक हलचल अब तेज़ होती जा रही है। रविवार 1 फरवरी को प्रस्तावित भारत बंद के समर्थन में बिल्सी की गल्ला मंडी के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि जिन व्यापारियों ने एक दिन पहले हिंदू सम्मेलन में बढ़-चढ़कर सहभागिता की थी, वही व्यापारी आज यूजीसी के विरोध में सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ आक्रोश जताते नज़र आए।
रविवार प्रातः करीब 10 बजे गल्ला मंडी गेट पर गल्ला व्यापारी एकत्रित हुए और “यूजीसी काला कानून वापस लो”, “सवर्ण एकता जिंदाबाद” जैसे नारों के साथ प्रदर्शन किया। पूरे दिन मंडी में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे यह साफ हो गया कि आंदोलन अब सिर्फ नारों तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक विरोध का रूप भी ले चुका है।
गल्ला व्यापारी एवं भाजपा नेता रजनीश शर्मा ने दो टूक कहा कि जब तक केंद्र सरकार यूजीसी के इस काले कानून को वापस नहीं लेती, तब तक विरोध लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आज भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक दोराहे पर खड़े हैं-एक तरफ अपने बच्चों का भविष्य दिखाई दे रहा है और दूसरी तरफ वही पार्टी, जिसे उन्होंने तन-मन-धन से सींचा, उसी पार्टी ने चुपके से यूजीसी के रूप में उनके बच्चों की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है।
व्यापारी नेता एवं समाजसेवी मनोज जैन ने कहा कि भले ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यूजीसी कानून पर फिलहाल रोक लगा दी गई हो, लेकिन जब तक सरकार इस पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक सवर्ण समाज का आंदोलन थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज रही कि यूजीसी अब भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं के लिए “गले की हड्डी” बन चुका है। कार्यकर्ताओं के भीतर बढ़ता असंतोष साफ नजर आ रहा है, जिसका असर आने वाले समय में पार्टी संगठन पर भी पड़ सकता है।
प्रदर्शन के दौरान दिलीप वार्ष्णेय, पंकज वार्ष्णेय, गौरव खासट, गब्बर वार्ष्णेय, सागर वार्ष्णेय, मोहित वार्ष्णेय, राजीव वार्ष्णेय, सतीश जैन सहित बड़ी संख्या में गल्ला व्यापारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं को नजरअंदाज किया, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप लेगा।


























