बिल्सी (बदायूं)।नगर पालिका परिषद बिल्सी द्वारा संगठित विकास योजना के अंतर्गत आवंटित भूखंडों पर गौशाला निर्माण की प्रक्रिया शुरू किए जाने से पात्र लाभार्थियों में भारी खलबली मच गई है। पीड़ित नगर निवासी मनोज कुमार और संजीव कुमार ने शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की है।

22 साल पुरानी योजना, आज तक नहीं मिला हक

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि 14 मार्च 2003 को नगर पालिका प्रशासन द्वारा सहसवान मार्ग स्थित गाटा संख्या 186 पर संगठित विकास योजना के तहत 50 व 72 वर्ग मीटर के भूखंड लॉटरी पद्धति से आवंटित किए गए थे। इस लॉटरी में दर्जनों पात्र लोगों को भूखंड मिले थे, जिनमें मौजूदा नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञान देवी सागर को भी एक भूखंड आवंटित हुआ था।

पीड़ितों का आरोप है कि सभी लाभार्थियों को आज तक न तो कब्जा मिला और न ही रजिस्ट्री कराई गई, जबकि नगर पालिका अध्यक्ष के पति ने वर्ष 2007 में अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान उसी भूखंड की रजिस्ट्री करा ली।

आम लाभार्थियों की अनदेखी, सत्ता पक्ष को फायदा?

मनोज कुमार और संजीव कुमार ने शिकायती पत्र में कहा है कि उन्होंने कई बार अपने भूखंडों की रजिस्ट्री और कब्जा दिलाने के लिए प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन हर बार उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया।
अब जब अचानक उसी भूमि पर नगर पालिका द्वारा गौशाला निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, तो लाभार्थियों में भारी आक्रोश फैल गया है।

गौशाला निर्माण बना विवाद की जड़

लाभार्थियों का कहना है कि जिन भूखंडों पर अब गौशाला बनाई जा रही है, वह भूमि उन्हें विधिवत लॉटरी से आवंटित की जा चुकी है।
ऐसे में बिना उनके भूखंडों को मुक्त कराए अथवा वैकल्पिक व्यवस्था किए सीधे निर्माण शुरू कर देना उनके संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

जिलाधिकारी से न्याय की गुहार

पीड़ितों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि—

  • पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
  • लाभार्थियों को उनका विधिवत आवंटित भूखंड दिलाया जाए
  • जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों पर कार्रवाई की जाए
  • एकतरफा तरीके से कराई गई रजिस्ट्री और कब्जे की भी जांच हो

नगर पालिका पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या संगठित विकास योजना सिर्फ कागजों में ही आम जनता के लिए थी, जबकि लाभ सत्ता से जुड़े लोगों को मिला?

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