नई दिल्ली। यूपी पंचायत चुनाव में जारी आरक्षण लिस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। बता दें कि शुक्रवार को ही फाइनल आरक्षण सूची भी जारी होनी है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली इस सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव होने से पहले चुनाव के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें वर्ष 2015 को आधार वर्ष मानकर यूपी में पंचायत चुनाव में सीटों के लिए आरक्षण लागू करने का आदेश दिया गया था।इसके पूर्व राज्य सरकार ने कहा कि वह साल 2015 को आधार मानकर आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिए तैयार है और अब उसी को आधार मानकर अंतरिम आरक्षण सूची भी जारी कर दी गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले पर कुछ लोग खुश हैं. वहीं कुछ इसके विरोध में भी हैं. दरअसल, इस व्यवस्था से कई ग्राम पंचायत के समीकरण ही बदल गए हैं. दिलीप कुमार नाम के एक युवक ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) में कहा है कि हाईकोर्ट के फैसले पर विचार किया जाना चाहिए.याचिकाकर्ता ने कहा, हाईकोर्ट में उनका पक्ष नहीं सुना गया है।
हाईकोर्ट के फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सीताराम बिसवां के दिलीप कुमार ने वकील अमित कुमार सिंह भदौरिया के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
हाईकोर्ट के आदेश पर बन रही है नई आरक्षण सूची :
इस समय आरक्षण लिस्ट पर आई आपत्तियों के निस्तारण का काम चल रहा है। 26 मार्च को फाइनल आरक्षण लिस्ट जारी होनी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से जुड़ी याचिकाओं को लेकर सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं।हाईकोर्ट ने 25 मई तक पंचायत चुनाव संपन्न कराने के लिए कहा था. अब देखने वाली बात ये है कि क्या उच्चतम न्यायालय हाईकोर्ट के फैसले पर विचार करने की मांग वाली याचिका पर क्या फैसला देता है…



























