बदायूं और सहसवान से संयुक्त रूप से प्राप्त जानकारी के आधार पर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें वन विभाग के एक दरोगा पर वन्य जीव तस्करी का आरोप लगा है। यह मामला तब उजागर हुआ जब वन्य जीव प्रेमियों को सूचना मिली कि वन विभाग के कर्मचारी एक प्रतिबंधित वन्य जीव का शिकार कर उसे अपनी कार में ले जा रहे हैं।





दरोगा विजय सिंह पर तस्करी का आरोप
12 जनवरी 2025 को दोपहर 12:15 बजे सूचना मिली कि सफेद रंग की स्विफ्ट कार (नंबर UP 24Q 9735) में वन विभाग के दरोगा विजय सिंह एक प्रतिबंधित पशु का शिकार कर सहसवान रेंज कार्यालय ले गए हैं। इस सूचना के आधार पर शिकायतकर्ता पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा अपनी टीम और 112 पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर कार की जांच की। जांच के दौरान, दरोगा विजय सिंह की कार की डिग्गी में खून से सना प्लास्टिक का कट्टा पाया गया। कट्टा खोलने पर उसमें सियार के कटे हुए अंग मिले, जिनमें सिर, चार पैर और धड़ शामिल थे।
सियार का शिकार: पकाकर खाने की आशंका
कटे हुए अंगों से ताजा खून टपक रहा था, जिससे प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि सियार को तांत्रिक क्रिया हेतु इसकी तस्करी या फिर इसका मांस पकाकर खाने के लिए शिकार किया गया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले भी एक हिरण के शिकार का मामला सामने आया था, जिसे दबा दिया गया था। यदि उस समय सही कार्रवाई की गई होती, तो यह घटना पुनः नहीं होती।
दरोगा पर तस्करी का शक, उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि दरोगा विजय सिंह वन्य जीव तस्करी में शामिल हो सकते हैं। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है।
पुलिस की कार्रवाई और तहरीर
थाना सहसवान पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है और तहरीर लेकर पावती रसीद भी जारी की गई है।इस दौरान घटना स्थल पर मौजूद पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा की टीम के सदस्य संजीब कुमार ने तहरीर दी, जिसमें दरोगा के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई है। इस दौरान संजीव कुमार, विकेंद्र शर्मा, विभोर शर्मा, और श्याम शर्मा आदि मौजूद रहे। इस घटना ने वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे समाज में वन्य जीव संरक्षण के प्रति चिंता बढ़ गई है।


























