बदायूं। संभल में मस्जिद के सर्वे को लेकर हुई हिंसा के बाद अब बदायूं का नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी मामला और भी संवेदनशील बन गया है। आज फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस विवाद की सुनवाई होगी। इस मामले को लेकर प्रशासन सतर्क है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
क्या है मामला?
यह मामला सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अमित कुमार की अदालत में ट्रायल पर है। वादी अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने 2022 में यह दावा किया था कि जामा मस्जिद के स्थान पर नीलकंठ महादेव मंदिर था।
वहीं, जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यहां मंदिर का कोई अस्तित्व नहीं था।
अब तक का घटनाक्रम
- सरकारी वकील की बहस: सरकारी वकील ने पहले ही अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं।
- पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट: मामले में पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है।
- मुस्लिम पक्ष की बहस: 30 नवंबर को इंतजामिया कमेटी की ओर से बहस शुरू हुई थी, लेकिन पूरी नहीं हो सकी। आज इस पर बहस जारी रहेगी।
आज का मुद्दा
अदालत आज इस बात पर सुनवाई करेगी कि यह मामला सुनवाई योग्य है या नहीं। इस मुद्दे पर मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें रखेगा। इसके बाद हिंदू महासभा की ओर से अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
संभल की घटना के बाद बदायूं प्रशासन सतर्क
संभल में हाल ही में मस्जिद के सर्वे को लेकर हुई हिंसा के कारण प्रशासन इस मामले को बेहद संवेदनशील मान रहा है। कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
- पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है।
- संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी गई है।
- प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
क्षेत्रीय और राजनीतिक प्रभाव
यह मामला न केवल कानूनी रूप से बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। संभल की घटना के बाद बदायूं में इसे लेकर लोगों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच माहौल गर्म है, लेकिन प्रशासन ने किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का फैसला ऐतिहासिक हो सकता है। अगर अदालत यह तय करती है कि मामला सुनवाई योग्य है, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।बदायूं में आज की सुनवाई से केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर और राष्ट्रीय पर भी निगाहें टिकी हुई हैं। अदालत का फैसला क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

























