जनता से किया गया “न खाऊंगा न खाने दूंगा” वायदा की निकली हवा


मुंबई। देशभर में पुल, फ्लाईओवर और मेट्रो निर्माण में हो रही लापरवाहियों और कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठते रहे हैं। बनारस, उज्जैन, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और गुजरात सहित कई राज्यों में निर्माणाधीन ढांचों के गिरने से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाओं पर प्रभावी लगाम लगाने वाली कड़ी कार्रवाई अब तक देखने को नहीं मिली है। शनिवार को मुंबई में हुआ ताजा हादसा भी इसी चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है।
मुंबई के मुलुंड (पश्चिम) इलाके में शनिवार दोपहर मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान बड़ा हादसा हो गया। एलबीएस रोड पर जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के पास निर्माणाधीन मेट्रो पिलर का सीमेंट स्लैब अचानक टूटकर नीचे से गुजर रहे एक ऑटो रिक्शा और कार पर गिर गया। हादसे की सूचना करीब दोपहर 12:20 बजे मिली।
इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिलर का भारी स्लैब सीधे ऑटो पर गिरा, जिससे ऑटो पूरी तरह चकनाचूर हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस, अग्निशमन दल और मेट्रो निर्माण कंपनी के कर्मचारी तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
हादसे पर देवेंद्र फडणवीस ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मामले की जांच के आदेश देते हुए मृतक के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने की बात कही गई है।
इस गंभीर घटना की जांच के लिए एमएमआरडीए ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति मेट्रो लाइन-4 परियोजना के अंतर्गत मुलुंड फायर स्टेशन के पास पियर संख्या 196 के नजदीक पैरापेट के ढहने की जांच करेगी। समिति की अध्यक्षता निदेशक (मेट्रो पीआईयू) बसवराज एम. भद्रगोंड करेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह की जानलेवा घटनाओं पर रोक लगना मुश्किल दिखाई देता है।


























