बदायूं–बिल्सी–बिजनौर राज्य मार्ग संख्या 51 के 35 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 25 फरवरी से चौड़ीकरण एवं सुधारीकरण कार्य का शुभारंभ हो चुका है, लेकिन यह बहुप्रचारित परियोजना बिल्सी नगरवासियों को जाम से राहत दिला पाएगी या नहीं—यह बड़ा सवाल बन गया है। शहर के लोगों का कहना है कि जब बाईपास का निर्माण ही नहीं हुआ, तो केवल हाईवे चौड़ा कर देना बिल्सी के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि इससे जाम की समस्या और गंभीर हो सकती है।
बताया गया है कि स्टेट हाईवे-51 का एक किलोमीटर से अधिक हिस्सा बिल्सी शहर के अंदर से होकर गुजरता है। इसी मार्ग से बदायूं से दिल्ली जाने वाली रोडवेज बसें, भारी वाहन, तथा वहजोई, संभल, गजरौला, मेरठ, हापुड़ और गाजियाबाद की ओर जाने वाले चार पहिया वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं। नतीजतन, शहर के भीतर इस सड़क पर हमेशा भारी ट्रैफिक का दबाव बना रहता है।
कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड द्वितीय द्वारा बदायूं से बिल्सी बाईपास (प्रस्तावित) एवं नरैनी चौराहे तक हाईवे को 7 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर किया जा रहा है। इसके तहत सड़क के दोनों ओर 1.5–1.5 मीटर चौड़ीकरण प्रस्तावित है। लेकिन बिल्सी नगर के भीतर केवल पुरानी सड़क का डामरीकरण और सतही सुधार किया जाना तय है—कोई वास्तविक चौड़ीकरण नहीं।
आज स्वदेश केसरी न्यूज़ की टीम ने ग्राउंड ज़ीरो पर हालात देखे, जहां शहर के अंदर जाम की स्थिति जस की तस बनी मिली। कोल्ड स्टोरेज सीजन शुरू होते ही आलू से लदी भारी ट्रॉलियां भी इसी मार्ग से गुजरने लगी हैं, जिससे हालात और अधिक चिंताजनक हो गए हैं।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का साफ कहना है कि जब तक बदायूं हाईवे को इस्लामनगर मार्ग से जोड़ने वाला बिल्सी बाईपास नहीं बनता, तब तक शहर को जाम से कोई वास्तविक राहत मिलने की संभावना नहीं है। लोगों का सवाल है—
“पहले बाईपास बनना चाहिए था, फिर हाईवे का चौड़ीकरण। वरना यह परियोजना बिल्सी के लिए सिर्फ कागजी विकास बनकर रह जाएगी।”
अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि शहर की इस जमीनी समस्या पर कब गंभीर निर्णय लेते हैं, या फिर बिल्सी यूं ही जाम की मार झेलता रहेगा।


























