उझानी (बदायूं)। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 149वें सत्र के दीक्षांत समारोह में उझानी की होनहार बेटी सिद्धि जैन ने देशभर में उझानी का नाम रोशन कर दिया। सिद्धि जैन को आज नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी द्वारा राष्ट्रपति कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। सिद्धि यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाली देश की पहली महिला कैडेट बनीं।

इसके साथ ही 28 नवंबर को आयोजित रीजनल ऑफिसर परेड में सिद्धि जैन को बेस्ट एयर फोर्स कैडेट का स्वर्ण पदक भी प्रदान किया गया। यही नहीं, उन्हें नौसेना प्रमुख के साथ उनकी टेबल पर विशेष रात्रि भोज का भी गौरव प्राप्त हुआ, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

शिक्षक परिवार की बेटी, बचपन से रही मेधावी

सिद्धि जैन उझानी के प्राथमिक विद्यालय शिक्षक निखिल जैन की पुत्री हैं। उनकी माता तृप्ति जैन भी प्राथमिक विद्यालय में अध्यापिका हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सिद्धि शुरू से ही अनुशासित और असाधारण प्रतिभा की धनी रही हैं।

  • कक्षा 10वीं (CBSE) में जिला स्तर पर द्वितीय स्थान
  • कक्षा 12वीं में APS स्कूल की टॉपर
  • JEE Mains में 99.32 परसेंटाइल प्राप्त कर NIT इलाहाबाद में चयन
हार नहीं मानी, दूसरे प्रयास में NDA में चयन

सिद्धि का सपना कुछ अलग और देश के लिए करने का था। जब महिलाओं के लिए NDA में केवल 19 सीटों के लिए आवेदन खुले, तो उन्होंने चुनौती स्वीकार की।
पहले प्रयास में परीक्षा तो उत्तीर्ण हुई, लेकिन एसएसबी इंटरव्यू में सफलता नहीं मिली। इसके बाद भी सिद्धि ने हार नहीं मानी।
दिसंबर 2022 में दूसरे प्रयास में सिद्धि का चयन NDA खडकवासला में पूरे देश की केवल 18 चयनित बेटियों में हुआ।

327 कैडेट्स को पछाड़कर रचा इतिहास

तीन वर्षों की कठिन ट्रेनिंग, अनुशासन, परिश्रम और संघर्ष के बाद सिद्धि जैन ने 149वें कोर्स में पास आउट हुए 327 कैडेट्स को पीछे छोड़ते हुए
राष्ट्रपति कांस्य पदक
बेस्ट एयर फोर्स कैडेट स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
सिद्धि रशियन भाषा कोर्स की टॉपर भी रहीं।

पूरे परिवार में खुशी की लहर

सिद्धि की बड़ी बहन संस्कृति जैन वनस्थली विद्यापीठ, जयपुर से B.Tech Computer Science के अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रही हैं, जबकि छोटी बहन शुचि जैन 12वीं CBSE की छात्रा हैं। शुचि ने भी वर्ष 2024 में 10वीं CBSE में 97 प्रतिशत अंक लाकर जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया था।

सिद्धि जैन ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है।

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