




बदायूं से प्रदीप कुमार शर्मा बिल्सी से ललित मोहन वार्ष्णेय की रिपोर्ट
बदायूं। दीपों का पर्व दीपावली इस बार जनपद के क्षेत्रों मे दो दिनों तक उल्लास और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। जहाँ सोमवार को नगर व शहरी क्षेत्रों में दीपों की जगमग रोशनी और पूजा-पाठ के साथ दीपावली का पर्व संपन्न हुआ, वहीं आज मंगलवार को ग्रामीण इलाकों में भी दीपों की लौ जलती देखी जा रही है।
ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक तर्क और पंचांग के आधार पर मंगलवार को दीपावली पूजन कर रहे हैं। उनका कहना था कि अमावस्या तिथि सोमवार को दोपहर बाद प्रारंभ हुई, जो मंगलवार प्रातः 5:54 बजे तक उदय तिथि में रही। इसलिए ग्रामीणों ने उदय तिथि को शुभ मानते हुए मंगलवार को लक्ष्मी पूजन किया।
दो दिन दीपावली से बनी संसय की स्थिति
नगर क्षेत्र में सोमवार की शाम बाजारों में दीपावली का उल्लास चरम पर रहा — घर, दुकानें, मंदिर सब दीपमालाओं से सजे हुए नजर आए। वहीं मंगलवार को जब आज ग्रामीण अंचलों में दीप जलाए जाने की खबर है जिसके चलते लोगों में यह चर्चा आम रही कि इस बार दीपावली दो दिन क्यों मनाई जा रही है। कई जगहों पर दोनों दिन दीप जलाये जाने से माहौल और भी उत्सवमय बना रहेगा।
पुरानी कहावत हुई चरितार्थ
ग्रामीण अंचलों में “मंगलवार की दीपावली, हँसे किसान, रोये व्यापारी” की कहावत खूब सुनाई दी। बुजुर्गों के अनुसार यह कहावत पुराने समय से लोकमान्यता के रूप में चली आ रही है। मान्यता है कि जब दीपावली मंगलवार को आती है, तब वर्षभर कृषि कार्यों में समृद्धि तो रहती है, लेकिन व्यापार क्षेत्र में मंदी या हानि की संभावना बनती है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी मंगलवार की दीपावली का विशेष योग
देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल व्यास जी ने बताया कि मंगलवार की दीपावली में मंगल ग्रह का प्रभाव अधिक रहता है, जो भूमि, परिश्रम और कृषि से जुड़े लोगों के लिए शुभ तो माना जाता है, परंतु व्यापार और धन निवेश के दृष्टिकोण से यह दिन अशुभ माना गया है। उन्होंने कहा कि अमावस्या तिथि और मंगलवार का योग “भौम अमावस्या” कहलाता है, जो पितृ तर्पण, शांति पाठ और साधना के लिए श्रेष्ठ समय होता है, परंतु नए लेन-देन और व्यापारिक प्रारंभ के लिए वर्जित बताया गया है।
बिल्सी मे कल अन्नकूट पर्व की तैयारी
अब दीपावली के बाद बुधवार को अन्नकूट महोत्सव मनाने की तैयारी नगर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जोरों पर है। मंदिरों में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जा रही है। श्रद्धालु मंगलवार की दीपावली के बाद अब गोवर्धन पर्व के लिए तैयार हैं, जो सहयोग, श्रद्धा और सामूहिकता का प्रतीक माना जाता है।


























