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बिल्सी के छात्रों का दर्द – साइंस- कॉमर्स पढ़ने को जाना पडता है बाहर, पर लड़कियों को आर्ट्स पढना हो जाता है मजबूरी, क्या केंद्रीय मंत्री बीएल.वर्मा करा पाएंगे इस विकट समस्या का समाधान?

पूर्व विधायक और मंत्री रहे भोले शंकर मौर्य के प्रयासों से ही बिल्सी मे हुई थी राजकीय महाविद्यालय की स्थापना,
बिल्सी क्षेत्र मे केंद्रीय विद्यालय की मांग हुईं तेज,

बिल्सी। तहसील मुख्यालय होने के बावजूद बिल्सी आज भी शैक्षिक दृष्टि से बेहद पिछड़ा हुआ है। यहां उच्च शिक्षा के अवसर सीमित हैं, जिससे प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को मजबूरी में बाहर के शहरों का रुख करना पड़ता है।

नगर में एकमात्र राजकीय महाविद्यालय वर्षों से संचालित है, लेकिन इसमें केवल आर्ट्स विषय की ही स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाएं उपलब्ध हैं। जबकि साइंस और कॉमर्स की पढ़ाई आज तक शुरू नहीं हो सकी। कई बार पहल और आश्वासन हुए, लेकिन सब कागजों और फाइलों में ही सिमटकर रह गए।

स्थानीय लोग मानते हैं कि यह स्थिति जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का जीता-जागता उदाहरण है। अगर अतीत की बात करें तो पूर्व विधायक और मंत्री रहे भोले शंकर मौर्य के प्रयासों से ही इस राजकीय महाविद्यालय की स्थापना हुई थी। लेकिन उसके बाद आज तक किसी भी सरकार और जनप्रतिनिधि ने इस क्षेत्र के शैक्षिक विकास को प्राथमिकता नहीं दी।

अब जबकि प्रदेश और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार है, स्थानीय बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों ने एक बार फिर इसके लिए कोशिशेँ शुरू की है। नगर के समाजसेवी डॉ. उमेंद्र गुप्ता, दिनेश वार्ष्णेय (डीडी), अमित वार्ष्णेय, दीपक चौहान समेत कई लोगों ने केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा से बिल्सी में केंद्रीय विद्यालय खोले जाने की मांग रखी है।

गौरतलब है कि बी.एल. वर्मा इसी विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं, यही उनकी जन्म और कर्मस्थली भी है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि वे इस क्षेत्र की शैक्षिक स्थिति सुधारने के लिए ठोस पहल करेंगे।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि “यदि अब भी शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो आने वाली पीढ़ियां भी पिछड़ेपन की इसी राह पर चलने को विवश रहेंगी।” अब सबकी निगाहें केंद्रीय मंत्री पर टिकी हैं कि क्या वे शिक्षा सुधार की इस मांग को धरातल पर उतार पाएंगे या यह भी पूर्ववर्तियों की तरह केवल आश्वासन तक सीमित रह जाएगा।

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