

बदायूं में गुरुवार को वन विभाग की लापरवाही का मामला सामने आया जब एक राष्ट्रीय पक्षी मोर के शव का पोस्टमार्टम प्लास्टिक की बोरी पर रखकर किया गया। इस घटना की तस्वीरें सामने आने पर संबंधित अधिकारी खामोश हो गए। पोस्टमार्टम के बाद मोर को तिरंगे में लपेटकर दफनाया गया, लेकिन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पोस्टमार्टम में बरती लापरवाही
दातागंज रेंज के एक गांव में मोर का शव मिलने की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए पशु चिकित्सा विभाग को सौंपा गया। लेकिन, तस्वीरों में दिखा कि राष्ट्रीय पक्षी का पोस्टमार्टम जमीन पर बिछी प्लास्टिक की बोरी पर किया गया। डॉक्टर ने इस दौरान ग्लब्स भी नहीं पहने थे, जो मानकों के खिलाफ है।
तस्वीरों ने खोली पोल
पोस्टमार्टम की तस्वीरों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी जिले में दो अन्य मोर के शवों का पोस्टमार्टम भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली में किया गया था, जहां प्रोटोकॉल का पालन किया गया था। लेकिन इस बार, स्थानीय स्तर पर मानकों की अनदेखी की गई।
अधिकारियों का बचाव और खामोशी
वन रेंजर अनुभव विसारिया ने पोस्टमार्टम के मामले में बयान देने से बचते हुए कहा कि वे इस पर जांच के लिए लेटर लिखेंगे। जब उनसे तस्वीरों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। वहीं, डीएफओ प्रदीप कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. समदर्शी सरोज ने कहा कि मोर का पोस्टमार्टम कहीं भी किया जा सकता है। लेकिन जब उनसे जमीन पर पोस्टमार्टम करने के बारे में सवाल किया गया, तो वे चुप्पी साध गए।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
यह घटना प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में मानकों की अनदेखी से स्पष्ट है कि जिम्मेदार अधिकारी राष्ट्रीय पक्षी के प्रति संवेदनहीनता बरत रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
इस घटना ने वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अब भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा?


























