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बदायूं: गौवंश के साथ क्रूरता की हदें हो रही पार, कुछ समय पहले तेजाब से जलाया था , अब सींग को बाँध दिया पैर से,

बदायूं। जनपद में पशुओं के साथ हो रही अमानवीयता ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। ताजा मामला कोतवाली क्षेत्र के घंटाघर इलाके का है, जहां एक गौवंश को कुछ पहले तेजाब से जलाने की हृदयविदारक घटना सामने आई थी। अब किसी ने इस निरीह जानवर के सींग को पैरों से रस्सी से बांधकर क्रूरता की सारी हदें पार कर दी। परेशान गौवंश घंटाघर इलाके में परेशान घूम रहा है, लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं।

पशु क्रूरता पर प्रशासन मौन

घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि गौवंश के शरीर पर जलने के निशान स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं, इसके सींग और पैर रस्सी से बुरी तरह से बंधे हुए हैं, जिससे इसे चलने में बेहद तकलीफ हो रही है। घंटाघर जैसे व्यस्ततम इलाके में यह गौवंश अपनी इस असहनीय पीड़ा से तङप रहा है , लेकिन न तो प्रशासन ने कोई कदम उठाया और न ही स्थानीय लोग इसे राहत देते नज़र आये ।

मानवता को झकझोरने वाली घटना

यह घटना पशुओं के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण है। गौवंश को देश में पूजनीय माना जाता है, लेकिन बदायूं में इस प्रकार की घटना ने समाज में बढ़ती अमानवीयता को उजागर कर दिया है। लोग शासन और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

पशु क्रूरता पर कानून मौन?

पशु क्रूरता के खिलाफ सख्त कानून होने के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता इन मामलों में चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस घटना की सूचना अधिकारियों को दी गई, लेकिन मौके पर कोई भी मदद के लिए नहीं पहुंचा।

जनता में आक्रोश

घटनास्थल पर मौजूद कुछ नागरिकों ने इस क्रूरता पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस तरह के अमानवीय कृत्यों को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बदायूं जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थान पर ऐसी घटनाएं समाज के लिए काला धब्बा हैं।

समाजसेवियों की अपील

स्थानीय समाजसेवी संगठनों और पशु प्रेमियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि घायल गौवंश का तुरंत उपचार कराया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

पशु संरक्षण की जरूरत

पशु प्रेमियों का कहना है कि गौवंश और अन्य पशुओं की सुरक्षा के लिए एक ठोस योजना बनानी होगी। इसके अलावा, जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को पशुओं के प्रति संवेदनशील बनाया जाना चाहिए।

क्या प्रशासन हरकत में आएगा?

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस घटना पर क्या कार्रवाई करता है। क्या दोषियों को सजा मिलेगी? या फिर यह मामला भी अनदेखा रह जाएगा?

इस घटना ने न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज के संवेदनशील पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत जताई है।

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