बदायूं जिले की प्रमुख तहसील बिल्सी, जिसकी स्थापना तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 1997 में की थी, आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। हालाँकि तहसील भवन नए मॉडल से बनाया गया था, 27 साल बाद इसकी हालत गंभीर रूप से खराब हो चुकी है। तहसील परिसर और इसमें बने विभिन्न कार्यालय लापरवाही और अनदेखी के कारण बदहाल हो गए हैं।



तहसील भवन की तीसरी मंजिल पर स्थित उप-निबंधक कार्यालय और पूर्ति कार्यालय सहित अन्य कार्यालय भारी बारिश के कारण टपकते नजर आते हैं। यही हाल दूसरी और पहली मंजिल के कार्यालयों का भी है।
इसके अलावा, तहसील परिसर में एक भी शौचालय और मूत्रालय नहीं है, जबकि प्रतिदिन सैकड़ों वादकारी महिला और पुरुष यहाँ आते हैं और सुविधा के अभाव में इधर-उधर भटकते हैं। अधिकारियों के लिए उनके कक्षों में अटैच टॉयलेट बनाए गए हैं, लेकिन आम जनता के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
बार संगठन के अध्यक्ष एडवोकेट गिरीश बाबू ने बताया कि पहले परिसर में शौचालय का निर्माण कराया गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि मेंटेनेंस के लिए 6 लाख रुपये तहसील प्रशासन को प्राप्त हुए थे, लेकिन अब तक कोई कार्य नहीं हुआ है।
बार एसोसिएशन बिल्सी ने नवागत एसडीएम से तहसील परिसर की समस्याओं पर ध्यान देने और उनका त्वरित निस्तारण करने की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से भी इस स्थिति पर ध्यान देने और आवश्यक सुधारों की दिशा में कदम उठाने की अपील की है।
तहसील परिसर में जलजमाव और आवारा पशुओं की समस्या भी गंभीर है। हाल ही में, तहसील गेट के सामने एक वाहन में भरकर सैकड़ों की तादाद मे कोई बंदरों को छोड़ गया था, जिससे परिसर में बंदरों का आतंक बढ़ गया है।
इन सभी मुद्दों के समाधान के लिए शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि तहसील परिसर को एक व्यवस्थित और सुविधाजनक स्थिति में लाया जा सके।

























