
बिल्सी।आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत प्रदेश स्तर पर आयुष्मान पखवाड़े का आयोजन 20 सितंबर से 30 सितंबर तक किया जा रहा है। इस दौरान नए आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को और सुलभ बनाना है।
हालांकि, इस योजना के लाभार्थियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आयुष्मान जन आरोग्य योजना के 6 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, केवल उन परिवारों को इस योजना का लाभ मिल पा रहा है जिनके नाम वर्ष 2011 की जनगणना में दर्ज हैं। इस कारण, वास्तव में जरूरतमंद परिवारों को जिनका नाम इस सूची में नहीं है, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
हाल ही में भारत सरकार ने योजना में कुछ संशोधन किए हैं, जिसके तहत श्रमिक वर्ग के लोगों को आयुष्मान कार्ड बनाने का लाभ दिया गया है। इसके साथ ही, जिनके राशन कार्ड में 6 यूनिट हैं, उन्हें निशुल्क आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा दी गई है। यह नीति उन परिवारों के लिए लाभकारी साबित हो रही है, लेकिन जिन परिवारों के पास 6 यूनिट से कम हैं, वे अभी भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकारें जनसंख्या नियंत्रण की बातें कर रही हैं, लेकिन जो परिवार 6 यूनिट या इससे अधिक का राशन रखते हैं, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इस दृष्टि से, 6 यूनिट से कम वाले कार्ड धारक निराश नजर आ रहे हैं।
इस साल बजट सत्र में घोषणा की गई थी कि 70 वर्ष या इससे अधिक के लोगों को आयुष्मान कार्ड निशुल्क बनाए जाएंगे। जबकि सीनियर सिटीजन का मानक 60 वर्ष है। इस स्थिति में, 60 वर्ष या इससे ऊपर की उम्र में सेवा निवृत्त सरकारी कर्मचारियों को इस योजना का लाभ लेने के लिए 10 वर्ष तक इंतजार करना पड़ेगा।
इस नीति के कारण आम जनता में आक्रोश व्याप्त है। लोग मांग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार को इस महत्वाकांक्षी योजना में आमूल-चूल परिवर्तन करना चाहिए, ताकि वास्तविक पात्र व्यक्ति ही इस योजना का सही लाभ ले सकें। इस प्रकार की चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार को त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं हर जरूरतमंद तक पहुंच सकें।

























