बिल्सी: तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी ग्राम स्थित आर्य समाज मंदिर में चल रही वेद कथा के पांचवे दिन, ईश्वर और उसके महत्त्व पर विशेष चर्चा की गई। वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने इस अवसर पर ईश्वर के प्रति लोगों की गलत धारणाओं और स्वार्थी प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला।
आचार्य संजीव रूप ने कहा कि दुर्भाग्यवश, आज लोग ना तो ईश्वर को सही मायने में जानते हैं और ना ही उन्हें सच्चे दिल से मानते हैं। उन्होंने समझाया कि ईश्वर को बिना जाने मानना हानिकारक हो सकता है, क्योंकि ऐसे में लोग अपने स्वार्थ के लिए ही परमात्मा से जुड़ते हैं। जब उनके स्वार्थ पूरे नहीं होते, तो वे ईश्वर को छोड़ देते हैं, या फिर उनसे ऐसी अपेक्षाएं रखते हैं, जिन्हें पूर्ण करना ईश्वर के लिए भी संभव नहीं होता।
उन्होंने यह भी कहा कि लोग दुख और विपत्ति के समय परमात्मा को याद करते हैं और दान-पुण्य की बातें करते हैं, लेकिन जब दुख के दिन बीत जाते हैं, तो वे इन बातों को भूल जाते हैं। आचार्य संजीव रूप ने कहा, “भगवान अपनी पूजा में भक्त का समर्पण चाहता है, न कि किसी प्रकार का द्रव्य, धन या भोग।” उन्होंने कहा कि बुराई को छोड़ने वाला ही परमेश्वर का सच्चा भक्त होता है।
इस अवसर पर सचिन कुमार, गोपाल उपाध्याय, अशोक पाल सिंह, मास्टर रामसेवक, मास्टर साहब सिंह, सुखवीर सिंह, दुर्वेश सिंह, विश्वजीत पाल, कृष्ण पाल, श्रीमती कमलेश रानी, श्रीमती संतोष कुमारी, भावना रानी सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।

























