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Gourav Vallabh Jairam Ramesh Controversy; Congress Manifesto | BJP Congress | गौरव वल्लभ बोले-जयराम रमेश को सिर्फ राज्यसभा की चिंता: जिसने क्लास मॉनिटर का चुनाव नहीं लड़ा, वो 30 साल से कांग्रेस का घोषणा पत्र बना रहा

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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गौरव वल्लभ ने 4 अप्रैल को भाजपा जॉइन की थी। (फाइल) - Dainik Bhaskar

गौरव वल्लभ ने 4 अप्रैल को भाजपा जॉइन की थी। (फाइल)

भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने रविवार (7 अप्रैल) को कांग्रेस नेता जयराम रमेश पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन इंचार्ज को सिर्फ अपनी राज्यसभा सीट की चिंता है। जिसने कभी क्लास मॉनिटर का चुनाव नहीं लड़ा, वह 30 साल से कांग्रेस का घोषणा पत्र बना रहा है।

4 अप्रैल को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन करने वाले गौरव वल्लभ ने कहा- जब मैं कॉलेज में था तब वे प्रवक्ता के तौर पर टीवी पर पार्टी को डिफेंड करते थे। आज वे कम्युनिकेशन इंचार्ज है। अगर उनके बनाए मेनिफेस्टों में कुछ अच्छा होता तो पार्टी महज 52 सीटों पर नहीं सिमटती।

गौरव बोले- कांग्रेस नए लीडर्स को तरजीह नहीं देती
गौरव वल्लभ ने कहा- कांग्रेस ने जिन कैंडिडेट्स को टिकट दिया है उनमें से कुछ को तो ये भी नहीं पता कि उत्तर प्रदेश और बिहार अलग-अलग स्टेट है। वे कन्फ्यूज हो जाते हैं। ये तो पार्टी का लेवल है। मैंने सोचा था कि कांग्रेस नए लीडर्स और नए आईडिया को तरजीह देगी। यही सोचकर मैंने कांग्रेस जॉइन की थी, लेकिन कांग्रेस नए आईडिया को प्राथमिकता नहीं देती है।

गौरव वल्लभ ने कहा कि कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को परेशान करने वाले मुद्दों को समझने में असमर्थ है। कांग्रेस ‘नए भारत’ की आकांक्षाओं और दिशाओं से भी नहीं जुड़ पा रही है।

गौरव वल्लभ ने इस्तीफे में लिखीं 2 बड़ी बातें …

1. पार्टी में नए आइडिया की कद्र नहीं होती
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेटर लिखते हुए गौरव ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों से पार्टी के स्टैंड से असहज महसूस कर रहा हूं। जब मैंने कांग्रेस पार्टी जॉइन की तब मेरा मानना था कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है। वहां सभी के आइडिया की कद्र होती है, लेकिन ऐसा नहीं है।

पार्टी का ग्राउंड लेवल कनेक्ट पूरी तरह से टूट चुका है और वह नए भारत की आकांक्षा को बिल्कुल भी नहीं समझ पा रही। इसी वजह से पार्टी न तो सत्ता में आ पा रही है और न ही मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा पा रही है। बड़े नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी पाटना बेहद कठिन है, जो राजनैतिक रूप से जरूरी है। जब तक एक कार्यकर्ता अपने नेता को डायरेक्ट सुझाव नहीं दे सकता, तब तक किसी भी प्रकार का सकारात्मक परिवर्तन संभव नहीं है।’

गौरव 2003 में RBI के थिंक-टैंक के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

गौरव 2003 में RBI के थिंक-टैंक के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

2. श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा में कांग्रेस के स्टैंड से परेशान हूं
‘अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा में कांग्रेस पार्टी के स्टैंड से मैं परेशान हूं। मैं जन्म से हिंदू और कर्म से शिक्षक हूं। पार्टी और गठबंधन से जुड़े कई लोग सनातन के विरोध में बोलते हैं और पार्टी का उस पर चुप रहना स्वीकृति देने जैसा है।

इन दिनों पार्टी गलत दिशा में आगे बढ़ रही है। एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं। यह कार्यशैली जनता के बीच पार्टी को एक खास धर्म विशेष का हितैषी होने का संदेश दे रही है। यह कांग्रेस के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है।’

कांग्रेस ने राजस्थान की उदयपुर सीट से मैदान में उतारा था
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस ने गौरव वल्लभ को उदयपुर सीट से उतारा था। उनके लिए पूर्व CM अशोक गहलोत ने चुनाव प्रचार किया था। इसके बावजूद वे BJP के ताराचंद जैन से 32 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए थे।

इसके अलावा 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने गौरव को जमशेदपुर पूर्वी सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ मैदान में उतारा था। तब भी वे जीत नहीं पाए थे। गौरव जोधपुर के रहने वाले हैं, लेकिन जमशेदपुर को अपनी कर्मभूमि मानते हैं।

टीवी डिबेट में संबित पात्रा से बहस के दौरान चर्चा में आए थे
गौरव वल्लभ (46) कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे। एक टीवी शो पर भाजपा नेता संबित पात्रा से बहस के दौरान वे चर्चा में आए थे। भाजपा बीते सालों से 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है। गौरव ने भाजपा प्रवक्ता से पूछा था कि ट्रिलियन में कितने शून्य होते हैं, ये तो बता दीजिए।

गौरव की अर्थव्यवस्था और वित्त मामलों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। उन्होंने अमेरिका से सर्टिफाइड फाइनेंस रिस्क मैनेजमेंट का कोर्स किया है। वे चार्टर्ड अकाउंटेंट की सबसे बड़ी संस्था ICAI के डायरेक्टर थे और कई कॉलेज में बतौर गेस्ट लेक्चरर पढ़ाने जा चुके हैं। 2003 में वह RBI के थिंक टैंक के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

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