

बिल्सी।लोकसभा के चुनाब जैसे जैसे नज़दीक आ रहे हैं बैसे बैसे जनता भी अपनी समस्याओं के समाधान को लेकर जागरूकता दिखाने लगी है। ऐसी ही एक विकट गम्भीर समस्या बिल्सी नगर में काफ़ी बर्षों से बनी हुई है,जिसके कारण बिल्सी का आधी आबादी त्रस्त है।वह समस्या है बिल्सी में वाईपास की आप कहेंगे कि बिल्सी में वाईपास पहले से बना हुआ है बात आपकी भी सही है लेकिन यह वाईपास बिसौली बजीरगंज रोड को सीधे बदायूँ व कछला कासगंज रोड को जोड़ता है।लेकिन आपको यह जानकारी भी होनी चाहिए कि बजीरगंज से बदायूँ से इस्लामनगर व गजरौला बिजनौर जाने के लिये बदायूँ बिजनौर स्टेट हाइवे 51 का लगभग डेढ़ किलोमीटर का हिस्सा बिल्सी शहर के मुख्य बाजार की तंग सड़कों से होकर गुज़रता है बिल्सी का अधिकांश बाजार इसी रोड पर पड़ता है,साथ ही इस मार्ग पर सरकारी बैंक, राजकीय छात्रावास, डिग्री कॉलेज, दो इंटरमीडिएट कालेज,तहसील,थाना कोतवाली, तथा बाजार स्थित है।
जब भी इस रोड़ से आप निकलेंगे तो इस मार्ग पर हमेशा जाम की स्थिति हमेशा बनी रहती है, यहां रोज़ाना घंटों घंटों के लिये रोड जाम रहता है। एक लंबे अरसे से कई बार इस मार्ग के चौड़ी कारण किए जाने की खबरें आई तो कई बार वाईपास मार्ग बनाये जाने की खबरें भी आती रही लेकिन हर बार यह बातें हवाहवाई साबित हुईं, जाम की स्थिति जस की तस बनी रही गौर रहे कि उपरोक्त मार्ग पर दो बार पीडब्ल्यूडी विभाग सड़क का डामरीकरण करा चुकी है इस कारण से लोगों को नगर से बाईपास निकालने की संभावना दिखाई देने लगी है।अब जब 2024 के लोकसभा चुनाव होने जा रहे है तब नगर के बाहर ही बाहर बाईपास निकालने की मांग उठने लगी है देखना है कि इस मांग को कौन सी पार्टी का प्रत्याशी कितनी गम्भीरता से लेकर इसको बनबाने का बायदा करता है,बहीं इस मांग को लेकर बिल्सी की जनता किसको बोट करती है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।
नगर के लोगों ने स्वदेश केसरी से बात करते हुए बताया की इस समस्या के समाधान के लिये कछला रोड से मिश्रीपुर मकईया से होता हुआ साधु पन्नालाल इंटर कॉलेज तिराहा, नगला जाटान होते हुए अगौल गांव से खैरी बस स्टैंड से आगे प्रस्तावित रोड़वेज बस स्टैंड के पास तक यह वाईपास रोड बन जाए तो बिल्सी की इस विकट समस्या से जनता को निज़ात मिल सकती है।लेकिन आजकल की जनता जो बिन मांगे भी प्रत्याशियों को समर्थन देने के लिये व्याकुल रहती है उससे अपनी समस्या की मांग जनप्रतिधियों के सामने रखने की उम्मीद कम ही रहती है।यही कारण है कि बिल्सी का आजतक विकास नहीं हो सका है।

























