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Congress central election committee meeting for upcoming Loksabha elections | भास्कर ओपिनियन- चुनावी रणनीति: देर से ही सही, आख़िर कांग्रेस जाग गई, उसे भी चुनाव लड़ना है!

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  • आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक

19 मिनट पहलेलेखक: नवनीत गुर्जर, नेशनल एडिटर, दैनिक भास्कर

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आख़िर कांग्रेस जाग गई। लोकसभा चुनावों के लिए प्रत्याशियों पर मंथन होने लगा है। कुछ सीटों पर तो प्रत्याशियों की पहचान भी कर ली गई है। भाजपा द्वारा दो सौ प्रत्याशी घोषित कर देने के बाद कांग्रेस का जागना बड़ा महत्वपूर्ण है।

जागने का मतलब यह तो है ही कि उन्हें चुनाव लड़ना है। ये बात अलग है कि साथी कौन है, कौन बनेगा, क़िससे गठबंधन होने वाला है, अभी तय नहीं है। दरअसल, कांग्रेस आलाकमान के पास जो ताक़त हुआ करती थी, उसमें यक़ीनन कमी दिखाई दे रही है। वर्ना किसी ममता बनर्जी की क्या हिम्मत कि वो यह कहें कि कांग्रेस पूरे देश में चालीस सीट भी नहीं जीत पाएगी!

बीते दिनों राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा जब बंगाल पहुंची तो ममता बनर्जी इसमें शामिल नहीं हुईं। अब तक बंगाल में कांग्रेस-TMC के बीच सीट शेयरिंग का मामला भी अटका हुआ है।

बीते दिनों राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा जब बंगाल पहुंची तो ममता बनर्जी इसमें शामिल नहीं हुईं। अब तक बंगाल में कांग्रेस-TMC के बीच सीट शेयरिंग का मामला भी अटका हुआ है।

क्या श्रीमती इंदिरा गांधी या राजीव गांधी के रहते कोई विपक्षी नेता ऐसी बात कह सकता था! नहीं। लेकिन अब अगर कोई यह कह रहा है तो इसका सीधा सा मतलब यह है कि पार्टी की कमान कमजोर हो रही है, और लगातार कमजोर होती जा रही है।

हर कोई जानता है कि अब तक लोकसभा की सर्वाधिक सीटें जीतने का रेकॉर्ड राजीव गांधी के नाम दर्ज है। अगले लोकसभा चुनावों में अगर भाजपा यह रेकॉर्ड तोड़ देती है तो यह भाजपा की कामयाबी से ज़्यादा कांग्रेस की नाकामयाबी होगी। क्योंकि कांग्रेस ने अपने हाथों यह कामयाबी भाजपा को परोसी है।

बार-बार ग़लतियाँ करना, देरी से निर्णय करना और फिर भी कमोबेश ग़लत निर्णय करना कांग्रेस की आदत बन चुकी है। अब तक जितने नेता कांग्रेस से टूटकर दूसरी पार्टियों में गए हैं, उतने नेता कभी किसी पार्टी से अलग नहीं हुए। हो सकता है इन नेताओं ने अपना हित या स्वार्थ देखा हो लेकिन वह हित कांग्रेस खुद उन्हें उपलब्ध कराती तो कोई दूसरी पार्टी का दामन क्यों थामता भला!

कांग्रेस घोषणापत्र समिति ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बुधवार को मेनिफेस्टो का ड्रॉफ्ट तैयार करके पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपा।

कांग्रेस घोषणापत्र समिति ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बुधवार को मेनिफेस्टो का ड्रॉफ्ट तैयार करके पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपा।

एक जमाना था जब कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर खेत की मिट्टी में कांग्रेस रची- बसी थी लेकिन आज की हालत देखकर ऐसा क़तई नहीं लगता। सच्चे मन से कांग्रेस को अपने ऊपर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है। देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी के ये हाल देखकर दया आती है।

आख़िर इस सबसे बड़ी पार्टी के इस हाल का ज़िम्मेदार कौन है? निश्चित रूप से नेतृत्व ही इसका ज़िम्मेदार माना जाएगा क्योंकि बाक़ी नेता तो सही समय पर सही निर्णय के लिए नेतृत्व का ही मुँह ताक़तें हैं और यह स्वाभाविक भी है।

कैप्टन ही कमजोर हो तो कोई क्या कर सकता है भला! समय की ज़रूरत है कि कांग्रेस फिर से अपने पैरों पर खड़ी हो, ताकि देश पर वो राज कर पाए या नहीं, यह तो भविष्य ही बता सकता है लेकिन कम से कम एक मज़बूत विपक्ष की भूमिका तो निभा पाए, जिसकी आज देश को सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

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