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Center said on Zero Food Children report – did not do primary research | जीरो फूड चिल्ड्रन रिपोर्ट पर केंद्र बोला-प्राइमरी रिसर्च नहीं की: सनसनीखेज बनाया, दावा था-देश में 24 घंटे में दूध-खाना न लेने वाले बच्चे 67 लाख

नई दिल्ली36 मिनट पहले

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जीरो फूड चिल्ड्रन रिपोर्ट 12 फरवरी 2024 को पब्लिश हुई थी। केंद्रीय बाल विकास मंत्रालय ने इसे बेबुनियाद बताया है। (फाइल) - Dainik Bhaskar

जीरो फूड चिल्ड्रन रिपोर्ट 12 फरवरी 2024 को पब्लिश हुई थी। केंद्रीय बाल विकास मंत्रालय ने इसे बेबुनियाद बताया है। (फाइल)

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की मेडिकल जर्नल जामा नेटवर्क ओपन में 12 फरवरी को एक रिसर्च पब्लिश हुई थी, जिसमें भारत के 6 से 23 महीने के बच्चों की स्टडी की गई थी। इसमें दावा किया गया था कि भारत में 67 लाख बच्चे जीरो-फूड कैटेगरी में आते हैं। इसका मतलब देश में 67 लाख ऐसे बच्चे हैं, जिन्होंने 24 घंटे में न तो किसी जानवर का दूध पीया या न ही खाना खाया।

इस स्टडी के मुताबिक, भारत में 19.3% बच्चे जीरो-फूड कैटेगरी में आते हैं। दुनिया के 92 लो और मिडिल इनकम वाले देशों की लिस्ट में भारत तीसरे नंबर पर है, जहां इतने बच्चे जीरो-फूड चिल्ड्रन की कैटेगरी में। लिस्ट में भारत से आगे गिनी (21.8%) और माली (20.5%) आते हैं।

केंद्रीय बाल विकास मंत्रालय ने इस स्टडी को बेबुनियाद बताया। मिनिस्ट्री की ओर से जारी किए गए स्टेटमेंट में मंगलवार(12 मार्च) को कहा गया कि इस स्टडी में प्राइमरी रिसर्च नहीं की गई है। इसे सनसनीखेज बनाया गया है। यह स्टडी फेक न्यूज फैलाने के लिए की गई है। इसमें किए गए दावे भ्रम फैला रहे हैं।

मिनिस्ट्री ने क्यों बताया स्ट्डी को फेक, 3 पॉइंट्स में समझिए

  1. मिनिस्ट्री ने कहा कि रिसर्चर्स ने स्टडी में ऐसे 9 पॉइंट्स गिनाएं हैं, जिसके जरिए उन्हें लगता है कि रिसर्च में कोई कमी रह गई होगी। इसलिए स्टडी पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। जीरो फूड चिल्ड्रन की वैसे भी कोई साइंटिफिक डेफिनेशन नहीं है।
  2. मिनिस्ट्री ने कहा स्टडी में फूड के लिए जानवरों का दूध और खाने की ही बात की गई है। लेकिन इसमें मां का दूध पीने वालों का जिक्र नहीं किया गया है। स्टडी में कहा गया है कि 19.3% बच्चों में से 17.8 % ब्रेस्ट फीडिंग करते हैं। अगर ऐसा होत वे भूखे कैसे हुए?
  3. मिनिस्ट्री ने कहा कि देश में आठ करोड़ बच्चों के खान-पान की आंगनवाड़ी सेंटर के जरिए ट्रैकिंग होती है। इसके लिए पोषण ट्रैकर नाम से पोर्टल बना हुआ है। स्टडी में पोषण ट्रैकर का डेटा नहीं लिया गया है। पोषण ट्रैकर के मुताबिक, बहुत कम बच्चे ही भारत में कुपोषित है।

सेंट्रल अमेरिका के कोस्टा रिका में हालत सबसे बेहतर
यह स्टडी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसवी सुब्रमण्यम और विजिटिंग साइंटिस्ट रॉकिल किम ने की है। उन्होंने 92 देशों के 6 से 23 महीने के कुल 2 लाख 76 हजार बच्चों पर रिसर्च की है। इसके लिए उन्होंने 2010 से 2022 तक के डेटा का डेटा लिया है, अलग-अलग देशों ने पब्लिक किया हुआ है।

प्रोफेसर्स के मुताबिक सभी 92 देशों में 10.4% बच्चे ऐसे है जो जीरो फूड कैटेगरी में आते हैं। सेंट्रल अमेरिका का कोस्टा रिका देश में सबसे कम 0.1% बच्चे ही 24 घंटे में बिना दूध और खाने के रहते हैं। प्रोफेसर्स का मानना है कि 6 से 23 महीने की उम्र बच्चों के डेवलपमेंट के लिए महत्वपूर्ण होती है। इस उम्र में उनको सही खाना मिलना चाहिए। यह दिक्कत सबसे ज्यादा वेस्ट अफ्रीका, सेंट्रल अफ्रीका और भारत में है।

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