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राजनीति बदल गई है…जो कभी साथ थे, वे अब आमने-सामने लड़ने को आतुर हैं। -बदायूं समाचार

राजनीति बदल गई है...जो कभी साथ थे वो अब आमने-सामने लड़ने को आतुर हैं.

सलीम शेरवानी।

बदायूं। अबकी बार जिले का सियासत नई करवट ले सकती है क्योंकि जो दिग्गज कभी साथ हुआ करते थे वे अब एक-दूसरे का आमना-सामना करने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। जाहिर है कि अगर दिगगज आमने-सामने आते हैं तो जिले का सियासी मिजाज बदलेगा और नतीजा भी प्रभावित होगा।

साल 2024 से पहले 2019 में लोकसभा चुनाव हुए थे तब सपा और बसपा मिलकर लड़े थे। बदायूं लोकसभा सीट से सपा के धर्मेंद्र यादव गठबंधन के उम्मीदवार थे। अबकी बार सपा ने शिवपाल सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया है, इसलिए भी सियासी मिजाज बदला है। अब बसपा-सपा का गठबंधन भी नहीं है। दोनों दलों के उम्मीदवार आमने सामने होंगे। कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं होगा क्योंकि सपा से गठबंधन है। हाल में ही सदर क्षेत्र के पूर्व आबिद रजा सपा के राष्ट्रीय सचिव का पद छोड़ चुके है। सलीम शेरवानी भी बागी तेवर अपना चुके हैं। सहसवान की सेक्युलर महापंचायत में शेरवानी ने बदायूं से चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। वहीं आबिद रजा आंवला से सपा के दावेदार रहे हैं। उनके समर्थकों ने बदायूं में उम्मीदवारी के लिए फ्लैक्सी लगवाई है। इसलिए उन्हें भी दावेदार माना जा रहा है। फिलहाल अभी दोनों दिग्गजों ने पत्ते नहीं खोले हैं ।

बीते 2019 चुनाव में यह थी स्थिति

भाजपा: संघमित्रा मौर्या 5,11,352

सपा: धर्मेंद्र यादव 4,92,898

कांग्रेस: सलीम इकबाल शेरवानी 51, 947

( संघमित्रा 18454 मतों से जीत गईं थीं, 10,81474 मत पड़े थे। 8606 मतदाताओं नोटा दबाकर सभी उम्मीदवारों को नापसंद किया था)

सलीम शेरवानी।

सलीम शेरवानी।

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