लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी ने अपने दूसरे लिस्ट तो जारी कर दिया लेकिन इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश के एक भी सीट के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई. तो वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने 31 लोकसभा सीटों पर टिकट वितरण करने के बाद विराम लगा दिया है. अभी तक आगे कोई नया नाम का ऐलान नहीं हुआ है और लगातार मंथन जारी है. सबसे पीछे कांग्रेस पार्टी है, जिन्हें 17 सीटों पर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ना है, लेकिन अभी तक एक भी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं किया है.2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी समेत विपक्षी पार्टियां उन तमाम प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारना चाहती हैं, जो जिताऊ हों.
बताया जा रहा है कि बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल पर लगातार मंथन कर रही है. इसी वजह से दूसरी लिस्ट में बीजेपी के एक भी प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नहीं हुई है. हालांकि, उत्तर प्रदेश बीजेपी के नेताओं का कहना है किसी भी तरीके का कोई मंथन नहीं हो रहा है. उम्मीदवारों का नाम स्पष्ट है, केवल मात्र ऐलान करने की देरी है. गौरतलब है कि दूसरी लिस्ट में यूपी के एक भी कैंडिडेट के नाम की घोषणा नहीं होने पर पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी, सुल्तानपुर से सांसद मेनका गांधी, कैसरगंज से सांसद बृजभूषण शरण सिंह को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं में ही चर्चा का विषय बना हुआ है. ऐसे में जिन सीटों पर वर्तमान सांसदों को टिकट नही दिया गया है उनकी टिकट कटने की भी चर्चा है.
समाजवादी पार्टी को गुटबाजी का डर?
वहीं दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन की बात करें तो समाजवादी पार्टी ने 31 उम्मीदवारों को टिकट देने के बाद विराम लगा दिया है और लगातार उम्मीदवारों पर मंथन कर रही है. संभल के सांसद शफ़ीक़ुर्रहमान बर्क की मौत के बाद उस सीट पर भी उम्मीदवार का ऐलान करना बाकी है. चर्चाएं हैं कि बर्क के परिवार से ही किसी को समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार घोषित करेगी. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के लिए यह भी चिंता है कि उम्मीदवारों के नाम के ऐलान के बाद कहीं उन्हीं के दल में गुटबाजी ना शुरू हो जाए, इसलिए भी एहतियात बरत रहे हैं. टिकट मांगने वालों का समाजवादी पार्टी दफ्तर में होड़ लगी हुई है. और आजमगढ़ सदर सीट से कौन चुनाव लड़ेगा अभी तक पार्टी यह भी नहीं तय कर पाई है. इसी सीट से मुलायम सिंह यादव सांसद चुने गए थे. यहीं से अखिलेश यादव भी सांसद थे, लेकिन पिछली बार उप इलेक्शन में अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को हार का सामना करना पड़ा था.
कांग्रेस भी असमंजस में
कांग्रेस पार्टी जिन्हें उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों में से 17 सीटों पर चुनाव लड़ना है. इन 17 सीटों में से गांधी परिवार के दो खानदानी सीट रायबरेली और अमेठी भी आती है. इन दोनों सीट से कौन चुनाव लड़ेगा अभी तक कोई बड़ा नेता खुलकर कुछ भी नहीं बोल पा रहा है. आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि कांग्रेस किस असमंजस में फंसी हुई है. एक तरफ कार्यकर्ता अमेठी से राहुल गांधी को दोबारा चुनाव लड़ने की मांग कर रहे हैं तो वहीं सोनिया गांधी के राज्यसभा में जाने के बाद रायबरेली सीट से प्रियंका गांधी को उम्मीदवार बनाने की भी मांग कर रहे हैं.भाजपा भी अपने पत्ते कोंग्रेस की लिस्ट के बाद खोलने के मूड़ में दिख रही है।

























