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रिसौली में रामकथा:भगवान श्री राम के वनवास प्रसंग सुन श्रोताओं की आंखों की आँखे भर आईं,

रिसौली।गांव की मोहनपट्टी में चल रही राम कथा में आज कथा व्यास संत श्री रविजी समदर्शी महाराज ने भगवान श्री राम के राजतिलक की तैयारी के साथ से लेकर वनवास तक कथा सुनाई जिसे सुन श्रोताओं की आंखें भर आईं। उन्होंने कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान जब से विवाहित होकर अवध में आए हैं तब से नित्य नए-नए मांगलिक उत्सव हो रहे हैं,प्रेम,सुख,शांति,संपन्नता,के घोर बादल बरस रहे हैं,


एक दिन राज भवन में समस्त मंत्रियों के सामने राजा दशरथ ने शीशा मंगाकर देखा थोड़ा सा मुकुट तिरछा था सिद्ध किया तो सफेद बाल दिखे,तुरंत विचार किया अब त्याग का,प्रभु प्राप्ति का समय आ गया,निर्णय लिया राज्य राम को सौंप देना चाहिए यह समाचार गुरुदेव को बताया,वशिष्ठ जी ने कहा राजन राज्य देने में देरी कैसी तुरंत दीजिए अभी और इसी वक्त दीजिए,लेकिन राजा दशरथ ने उसे कल पर टाल दिया और वो कल 14 वर्ष बाद आई असुभ कार्य कल पर टालो,और शुभ कार्य को अभी करो, तत्काल करो।गुरुदेव राम जी के कक्ष में आकस्मिक आ गए राम ने सम्मान किया गुरुदेव ने युवराज बनने से पहले के नियम संयम राम जी को बताए और आशीर्वाद देकर चले गए l

राम जी जानकी जी से कहते हैं देवी हम भाइयों ने एक साथ जन्म लिया,खेले,सोए,खाया, जनेऊ,विवाह हुआ है फिर भी मैं राजा बनू मेरा छोटा भाई भरत राजा क्यों नहीं बन सकता,मुझे इस बात की बड़ी ग्लानि है,इधर अवध दुल्हन की तरह सजाया जाने लगा,

मंथरा को जैसे ही पता चला राम का राजतिलक होने वाला है, दौड़कर कैकई के पास पहुंची और कैकई को खूब भड़काया तुझे पता है तेरा बेटा विदेश में है और राजा कौशल्या के कहने पर राम को युवराज बना रहे हैं,कल राज तिलक है एक माह से तैयारी हो रही है और तुझे समाचार तक नहीं,तुम्हें तो नींद से,राजा के झूठे प्रेम से ही फुर्सत नहीं है,अपने बेटे के बारे में कभी सोचा ही नहीं,कैकई मंथरा को डांटकर बोली कुबड़ी तू हमारा परिवार बर्बाद करना चाहती है,मंथरा बोली में तुम्हारा बुरा नहीं देख सकती,तुम्हारा खाती हूं,पहनती हूं सत्य कह रही हूं हमारा इसमें कोई दोष नहीं है जो मैंने देखा सो कह दिया वैसे कोई भी राजा बने हमें क्या हानि है भारत राजा बने राम राजा बने मैं, में तो दासी ही रहूंगी,कौशल्या की बात सुनकर आई हूं कह रही थी अगर कैकई नहीं मानती है तो कैकई भरत को जेल में डाल दो, बहुत प्रकार से समझा कर कैकई का मन बदला कैकई ने कहा मुझे क्या करना चाहिए तब उसने कहा तुम्हारे दो वरदान राजा पर है अभी मांग लो कोप भवन में जाकर लेट जाओ, कैकई ने वही किया जो मंथरा ने कहा जब राजा ढूंढते हुए कैकई के पास कोपभवन आए,देखा कैकेई अस्त व्यस्त पड़ी हैं, समझाने लगे जब नहीं मानी तब राजा ने कहा देवी कुछ चाहिए तो मांग लो क्या चाहिए, बोली पहले तो कभी कुछ दीया नहीं,मेरे पहले के ही दो वरदान है वही दे दो,बोल दो क्या चहिए मांग लो दो नही चार मांग लो,केकई वरदान मांगती है राजन पहले वरदान में राम की जगह मेरा बेटा भारत राजा हो और दूसरा वरदान तपस्वी वेश में 14 वर्ष राम बनवास में रहैं, राजा ने धैर्य रखते हुए कहते हैं देवी ऐसा अपराध मत कर ऐसे मत बोल मेरे भारत और राम यह दोनों दो आंखें हैं और राम तो मेरा प्राण देवी हाथ जोड़कर मैं तुमसे भीख मांगता हूं दूसरे वरदान में थोड़ा परिवर्तन कर दे वन की जगह गुरु आश्रम में रहने की अनुमति दे दे अगर मेरे राम ने कहीं पूछ लिया कि मुझे यह सजा किस लिए दी गई है तो मैं उसे आंख उठा कर देख भी नहीं सकता मुंह से क्या कहूंगा मेरे राम से या कौशल्या से कोई गलती हो गई हो तो मैं राम का पिता तेरे चरण पड़कर क्षमा मांगता हूं उसे क्षमा करदे रानी मेरा जीवन तो राम के अधीन है मेरे प्राण राम के बिना नहीं रह सकते क्या तू विधवा होना चाहती है यह गरीब दशरथ प्राणों की भीख मांगता है मुझे श्यामा गाय समझकर क्षमा कर दे,रानी ने चीख कर कह दिया राजन सुन लो अंतिम बार कह देती अगर सुबह होते ही सूर्य निकलने से पहले राम मुनिवेश में वन को नहीं गए तो मैं सरयु में डूब कर अपना जीवन समाप्त कर लूंगी अपयश से बचना है तो राम को तुरंत वन में भेजिए।


आज की कथा में सोनू शर्मा,विपिन सिंह,योगेश बजाज,भानू चौहान,सतीश कश्यप,अवधेश महेश्वरी,अवधेश पाली,राजेश पाली,धर्मेंद्र महेश्वरी,दिनेश पाली,रिंकू चौहान,राजू चौहान,दुष्यंत सोलंकी,राजेंद्र शर्मा,राजेश सिंह,अतुल सोलंकी ,सुनील सोलंकी,सुनील सिंह, राजीव राणा,नितिन शर्मा,संजीव सिंह,आदि सैकड़ों राम भक्तों ने कथा सुन आरती प्रसाद पाया l

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