बदायूं । कुंवरगांव थाना क्षेत्र के जंगल में 13 फरवरी को एक 55 साल के अधेड़ व्यक्ति का शव मिला था। उसका सिर धड़ से अलग था। उसको बहुत बेरहमी से मारा गया था। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही थी । जांच में सामने आया कि परिवार ने जिन लोगों का नाम लिखवाया था, वो लोग इस हत्याकांड में शामिल नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने दूसरे एंगल से मामले की जांच की। 21 फरवरी को पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लेते हुए इस मामले का खुलासा कर दिया। मरने वाले व्यक्ति का नाम बांके है।
आरोपियों ने महिला के चक्कर में बांके को फंसाया
पुलिस जांच में सामने आया कि बांके की हत्या 25 साल पुराना बदला लेने के लिए की गई थी। साल 1998 में बांके के गांव के गुलफाम की हत्या हुई थी। तब गुलफाम के परिवार ने बांके पर हत्या का आरोप
लगाया था। लेकिन, तब वो सबूत के अभाव में बच गया था। इस बात का बदला लेने के लिए गुलफाम के परिवार ने बांके की हत्या करवाने का प्लान बनाया। उन लोगों ने पहले बांके को एक महिला के चक्कर में फंसाया। उसके बाद महिला के सहारे बांके को अकेले बुलाकर उसकी बेहरमी से हत्या कर दी और भाग गए। पुलिस ने इस मामले में महिला समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि,हत्या की सुपारी देने वाला हाकिम नाम का शख्स अभी फरार है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों का नाम फाजिल , जाबिर और पूजा है।

ये बांके का भाई है, जिसने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाई का आरोप..पुलिस मुख्य आरोपी को नहीं पकड़ रही वहीं, बांके के भाई राजपाल का कहना है, इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड गुलफाम का भाई गुड्डू है, लेकिन पुलिस ने उसको छोड़ दिया। 40 लाख रुपए लेकर उसका नाम ही इस कांड से हटा दिया गया है। इस पूरे कांड का वो मुखिया है। उसकी पहचान ऊपर तक है। अगर वो बाहर रहा, तो हमारे पूरे परिवार पर खतरा बना रहेगा।
अब पढ़िए पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने
क्या बताया-
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि साल 1998 में गुलफाम को इसी गांव में बहुत बेरहमी से मारा गया था। उसका शव तक परिवार के लोग पहचान नहीं पा रहे थे। गुलफाम के परिवार को भरोसा था कि बांके इसमें शामिल है। लेकिन तब किसी ने भी गुलफाम के परिवार की बात नहीं सुनी। बांके परिवार की नजरों के सामने खुलेआम घूमता रहता था। ये देखकर परिवार के लोगों का खून खौलता था। उनके मन में हर समय यही चलता रहता था कि इसको कैसे खत्म करें? बांके की हत्या के एक आरोपी फाजिल ने बताया, “हाकिम काफी समय से बांके को मारने का तरीका खोज रहा था। हाकिम के परिवार को पता चला था कि बांके ने गांव के कुछ लोगों से गुलफाम को मारने की बात कही है।

ये गांव के लोग हैं, जो सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
फाजिल और बांके में भी कुछ विवाद चल रहा था..
“मैं हाकिम के गांव के पास ही रहता हूं। हाकिम ने मुझसे दो लाख रुपए में बांके की हत्या की सुपारी तय की। मेरे खिलाफ पहले से ही कई मामले दर्ज हैं। ऐसे में मैं हाकिम की बातों में आ गया और इस हत्याकांड के लिए तैयार हो गया। इसके अलावा मेरा और बांके का भी कुछ विवाद चल रहा था। जिस वजह से भी मैं बांके को मारने के लिए तैयार हो गया।इसके बाद जाबिर, हाकिम और मैंने मिलकर एक बटन वाला फोन लिया। फर्जी आईडी पर सिमकार्ड भी लिया। इसके बाद पूजा से बांके से दोस्ती करने के लिए बोला करीब 2 महीने से पूजा बांके से बात कर रही है। पूजा अनजान महिला बनकर बांके से बातें करती थी। कुछ समय बाद पूजा और बांके का अफेयर हो गया।
जिसके बाद पूजा को बांके ने गांव के एक खेत पर बने ट्यूबवेल पर बुलाया। पूजा ने इसकी जानकारी जाबिर, हाकिम और मुझे दे दी। हम तीनों पहले से खेत पर पहुंच गए। उसके बाद जब बांके खेत पर पहुंचा, तो हम तीनों ने मिलकर बांके का सिर धड़ से अलग करके उसकी हत्या कर दी। उसके बाद हम लोग वहां से फरार हो गए।
बरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बोले- हनी ट्रैप में फंसाकर बांके की हत्या की गई
इस मामले में SSP आलोक प्रियदर्शी ने बताया, हाकिम मारना भी चाहता था और फंसना भी नहीं चाहता था। इसके लिए उसने मुझसे, जाबिर और पूजा नाम की महिला की मदद ली। ये दोनों मेरे दोस्त हैं।”
लेकर पूछताछ की जा रही है। परिवार के लोग एक और व्यक्ति का नाम ले रहे हैं, जिसकी हम लोग जांच कर रहे हैं। सच्चाई पाए जाने पर उस पर भी एक्शन लिया जाएगा। हनी ट्रैप में फंसाकर बांके की हत्या
की गई है। हाकिम की भी तलाश की जा रही है।

























