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Delhi poll official s internal note creates flutter about Lok Sabha election date | दिल्ली पोल अफसर के नोट से खलबली: आम चुनाव की टेंटेटिव तारीख 16 अप्रैल लिखी, EC की सफाई- यह सिर्फ अधिकारियों के रेफरेंस के लिए

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  • दिल्ली चुनाव अधिकारी के आंतरिक नोट से लोकसभा चुनाव की तारीख को लेकर हलचल मच गई है

नई दिल्ली9 मिनट पहले

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दिल्ली के चीफ इलेक्शन ऑफिसर की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अफवाहों का खंडन किया। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

दिल्ली के चीफ इलेक्शन ऑफिसर की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अफवाहों का खंडन किया। (फाइल फोटो)

मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 16 जून 2024 तक है। यानी इससे पहले आम चुनाव होना है। लेकिन मंगलवार को दिल्ली के एक चुनाव अधिकारी के लेटर से चुनावी तारीख की चर्चा गरमा गई। इसमें 16 अप्रैल की तारीख का जिक्र था।

इसके कुछ देर बाद दिल्ली के चीफ इलेक्शन ऑफिसर ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे लेटर को लेकर सफाई जारी की। इसमें स्पष्ट किया किया गया कि 16 अप्रैल का जिक्र चुनाव की एक टेंटेटिव तारीख के रूप में किया गया है। यह सिर्फ अधिकारियों के रेफरेंस के लिए था।

वायरल हुआ लेटर ये है…

ये लेटर मंगलवार को सोशल मीडिया में वायरल हुआ।

ये लेटर मंगलवार को सोशल मीडिया में वायरल हुआ।

दिल्ली CEO ऑफिस ने अटकलों को खारिज किया
दिल्ली के चीफ इलेक्शन ऑफिसर की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि मीडिया के लोग लगातार पूछ रहे हैं कि क्या दिल्ली में आम चुनाव की संभावित तारीख 16 अप्रैल है? इसलिए साफ किया जाता है कि इस तारीख का जिक्र एक्शन प्लान बनाने के लिए किया गया है।

लोकसभा चुनाव से पहले EC की नई गाइडलाइन
दिसंबर 2023 में चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों के लिए गाइडलाइन जारी की। आयोग ने पार्टियों को इलेक्शन कैंपेन में दिव्यांगों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल न करने के निर्देश दिए।

आयोग ने पार्टियों से कहा- दिव्यांगों के लिए गूंगा, पागल, सिरफिरा, अंधा, काना, बहरा, लंगड़ा, लूला, अपाहिज जैसे शब्दों का इस्तेमाल न किया जाए। कैंपेन के दौरान नेताओं की स्पीच, सोशल मीडिया पोस्ट, विज्ञापन और प्रेस रिलीज में ऐसे शब्दों को इस्तेमाल न हों। अगर इसका उल्लंघन हुआ तो दिव्यांगजन अधिकार एक्ट, 2016 के सेक्शन 92 के तहत 5 साल तक की जेल हो सकती है।

चुनाव आयोग ने दिए ये निर्देश

  1. पार्टियों को कैंपेन के दौरान स्पीच, सोशल मीडिया पोस्ट, विज्ञापन और प्रेस रिलीज को रिव्यू करना होगा।
  2. पार्टियों को कैंपेन के दौरान स्पीच, सोशल मीडिया पोस्ट, विज्ञापन और प्रेस रिलीज को दिव्यांगों के लिए भी जारी करना होगा।
  3. पार्टियों को कैंपेन के दौरान स्पीच, सोशल मीडिया पोस्ट, विज्ञापन प्रेस रिलीज समझने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
  4. पार्टियां को अपनी वेबसाइट पर बताना होगा कि उनकी पार्टी दिव्यांगों को भी सामान्य लोगों की तरह सम्मान से देती है।
  5. पार्टियों को अपने कार्यकर्ताओं को दिव्यांगों से संपर्क करने के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल जारी करना होगा।
  6. पार्टियों को दिव्यांगों की शिकायत सुनने के लिए अथॉरिटी भी अपॉइंट करनी चाहिए।
  7. पार्टियों को दिव्यांग लोगों को कार्यकर्ता या मेंबर बनाना चाहिए। इससे दिव्यांगों की चुनाव में भागीदारी बढ़ेगी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान दिव्यांगों को वोट फ्रॉम होम की सुविधा थी।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान दिव्यांगों को वोट फ्रॉम होम की सुविधा थी।

दिव्यांगों के लिए वोट फ्रॉम होम की सुविधा
चुनाव आयोग ने बीते कुछ समय से दिव्यांगों का वोट प्रतिशत बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 से दिव्यांगों के लिए खास सुविधा शुरू हुई है। इसमें 40% से ज्यादा दिव्यांग लोग घर से वोट डाल सकते थे। इसके लिए उन्हें चुनाव का नोटिफिकेशन जारी होने के 5 दिन के अंदर एक फॉर्म भरना होता था। इसके बाद सरकारी कर्मचारी वोटिंग के लिए दिव्यांगों के घर पहुंचे थे। इस प्रोसेस की वीडियोग्राफी भी की गई थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी ये सुविधा थी।

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