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मेरे राम सेवा आश्रम पर श्री राम कथा का पांचवा दिन,भगवान राम ने दबे कुचले गरीब निर्बल सभी का छोटापन ,मिटाकर उन्हें ऊंचा उठाया ह्रदय से लगाया प्रेम लुटाया-संत रवि जी समदर्शी महाराज

जो आनंद सिधु सुख राशि
सीकर तें त्रेलोक सुपासी
सो सुखधाम राम अस नामा
अखिल लोक दायक विश्रामा

उझानी।नगर के मेरे राम सेवा आश्रम पर पवित्र मास पुरुषोत्तम माघ मास में नौ दिन तक चलने वाली श्री राम कथा महोत्सव में
आज पांचवे दिन कथा बाचक संत श्री रवि समदर्शी जी महाराज ने राम जन्म के बाद की कथा का संस्मरण सुनाते हुए बताया कि
भगवान शंकर ने पार्वती को कथा सुनाते हुए कहते हैं कि देवी मैंने एक चोरी की जैसे ही पार्वती ने सुना वे चौक गई बाबा आपने और चोरी हां देवी हमने तुमसे कुछ छुपाया है मुझसे छुपाया भला कोई अपनी पत्नी से क्या छुपाता है ऐसी कौन सी बात थी जो मुझसे छुपाई बाबा कहते हैं बड़े आनंद की बात है बड़ी प्रसन्नता की बात है।

हम और काग भुसुंडी दोनों मनुष्य रूप में अयोध्या गए पता है क्यों गए इसलिए गए कि हमारे प्रभु का जन्म हुआ है अयोध्या में और हम दोनों गुरु चेला मानुष्य बन कर गए, हर गली गली में प्रचार किया अवध में ज्योतिषी आए बूडो ब्राह्मण शंकर नाम कहायो,अवध में ज्योतिषी आयो देवी जब महल के द्वार पर पहुंचे अपरिचित जानकर हमें द्वारपालों ने अंदर प्रवेश नहीं करने दिया तब मन दुखी हुआ हम सरयू किनारे आ गए सुमिरन करते रहे भगवान से प्रार्थना करते रहे प्रभु दर्शन दो दर्शन दो, कई दिन बीत गए सब प्रयास किए लेकिन दर्शन नहीं हुए तब हमने अंतर्मन से भगवान से कहा प्रभु अगर आपने हमें दर्शन नहीं दिए तो हम इसी सरयू में अपने शरीर को प्रवाहित कर देंगे तब भगवान ने लीला रची खूब रोए,वशिष्ट जी भी आए कोई चुप नही करा पाया तब मां कौशल्या ने अपनी दासियों को सरयू किनारे भेजा ताकि कोई बालक को ठीक करने वाला ज्योतिषी सन्यासी जन मिल जाए,दासियों ने हमसे पूछा बाबा आप कुछ जानते हो, हमने कहा हमारा तो यही काम है,हम तो उनके साथ दौड़े चले गए दासियां महल में हमें भी बुला ले गई और हम दोनों गुरु चेला ने उन के दर्शन किये धन्य धन्य हो गए भगवान के चरणों में माथा रखकर आनंद आ गया । कथा में आज भगवान श्री राम सहित चारों भाइयों के नामकरण की कथा सुनाई,

भगवान के दर्शन करने के लिए जब तब संत ऋषि भक्त महल के दरवाजे पर आकर भिक्षा मांगने आते हैं, और कहते हैं भिक्षा नहीं चाहिए मुझे भिक्षा में बदले आपके लाला के दर्शन चाहिए महल की अंदर झाक कर रोते हैं कहते हैं काश हमें भगवान ने इस महल का पत्थर ही बना दिया होता ताकि हम लाला के हाथों के पैरों के स्पर्श का सुख भोग सकते हम दुर्भाग्यशाली है और रोकर मां दर्शन करा देती है तो प्रसन्न होकर जाते हैं मां बार-बार भगवान की बलैयां लेती है मां ताकि मेरे बेटे को नजर न लग जाए।

कथा व्यास श्री रवि समदर्शी जी महाराज ने कहा कि भगवान राम ने जन्म से और बैकुंठ जाने तक अंहकारियों का अहंकार मिटाया,लेकिन दबे कुचले गरीब निर्बल सभी का छोटापन ,मिटाकर उन्हें ऊंचा उठाया ह्रदय से लगाया प्रेम लुटाया पर क्योंकि भगवान प्रेम के भूखे हैं।अंत मे आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया।

आज की कथा में श्रीमती कमलेश मिश्रा, अंजू चौहान, विष्णु गुप्ता गुड्डी गुप्ता राखी साहू मोना चौधरी ममता अनुराधा सक्सेना, उत्पल गुंजन सक्सेना, दीपा, सोनी,अर्चना गिरीशपाल शिसोदिया,अलंकार सोलंकी,डी पी सिंह, राहुल अग्रवाल, मोहित, सुरेन्द्र गुप्ता, अजय यादव, अखलेश, विनीत,गजेन्द्र पंत, सतेन्द्र चौहान,सतेंद्र सोलंकी अरविंद शर्मा सहायता शर्मा, धर्मेन्द्रसाहू, धर्मेन्द्र सक्सेना,अजय कुमार,अमर साहू ,शशांक, मुकेश राकेश, नमन सैनी अमन, नमन, लोकेंद्र सत्यम, बाबू शाक्य, प्रवीन, दीपेश,विजय संखधार आदि सैकड़ों राम भक्त उपस्थित रहे।

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