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बदायूँ: नकली नोट छापने की फैक्ट्री की पड़ताल:सामने आने लगे सफेदपोशों के नाम,जाँच में बैंक कैशियर का भी नाम।अभी खुलेंगे कई राज।

बदायूं : दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने नकली करेंसी के साथ जरीफनगर के दो और बिल्सी के एक आरोपित को गिरफ्तार किया। अब रिमांड पर उनसे पूछताछ चल रही तो हर दिन नए नाम सामने आ रहे। उनकी टीम में कौन कौन था यह पता चल रहा।

ग्राम प्रधान का देवर ही मुख्य सूत्रधार नकली नोटों की तस्करी के मामले में जरीफनगर इलाके की एक ग्राम प्रधान के देवर की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि वह नकली नोटों के तस्करों को हर सुविधाएं मुहैया कराता था। जब एक जनवरी को दिल्ली की स्पेशल सेल ने दबिश दी थी, तब ग्राम प्रधान का देवर दीवार कूदकर फरार हो गया था। तब से स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां उसकी तलाश में हैं।दानिश ने पूछताछ में बताया कि देवर ही करेंसी छपवाता था और उनसे लेकर सप्लाई करता था।वह कई सालों से इस धंधे में जुड़ा था। उसने ही दानिश को इस धंधे में लगाया। उसने ही सेटअप लगाने के लिए रुपये का निवेश किया था। पता चला कि यासीन ही रुपये काे 30 से 40 परसेंट पर ग्राहकों को चलाने के लिए देता था। इसके बदले उसे असली करेंसी मिलती थी। इसके बाद से दिल्ली पुलिस की टीम प्रधान के देवर यासीन की तलाश में जुटी हैं। गुरुवार और शुक्रवार को एक टीम ने जरैठा, सहसवान और जरीफनगर के अलग अलग स्थानों पर दबिश दी। लेकिन जिन्हें वह ढूंढ रहे थे, वह हाथ नहीं लगे।

बैंक कैशियर भी था धंधे मे शामिल

पूछताछ में एक बैंक के कैशियर का नाम भी सामने आया है।इस्पेंक्टर मनेंद्र सिंह की टीम इनको रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। आसिफ ने बताया कि गिरोह का मुख्य सरगना जरेठा गांव बदायूं की प्रधान का देवर यासीन व उसका साथी खुशी मोहम्मद है। आसिफ ने बताया कि उन्होंने पिछले 10 दिन में 50 लाख रुपये के नकली नोट छाप लिए थे। वह नकली नोट छापकर यासीन को देते थे और यासीन आगे नकली नोटों को खपाता था। वह एसबीआई बैंक के कैशियर को तीन वर्ष से नकली नोट दे रहा था। उसके पकड़े जाने के बाद ही आरोपी कैशियर के बारे में पता लगेगा। कैशियर के पकड़ में आने के बाद ही पता लगेगा कि वह कितने रुपये के नकली नोट खपा चुका है।

पुलिस प्रधान के देवर यासीन की तलाश में लगी है। इसके लिए गुरुवार रात से शुक्रवार तक कई ठिकानों पर दबिश भी दी गई। लेकिन प्रधान के घर टीम को कोई नहीं मिला। वहीं सहसवान कस्बे के अकबराबाद और जरीफनगर के उस्मानपुर में दबिश दी। इसके अलावा संभल के कादराबाद में भी टीम आरोपितों की तलाश में पहुंची, लेकिन सफलता नहीं मिली।

हॉस्पिटल में ही लगा रखा था सेटअप दानिश सहसवान के चौकी नंबर चार इलाके में एक निजी अस्पताल चलाता था। उसकी ऊपरी मंजिल पर नोट बनाने का काम चल रहा था। इस धंधे में दानिश, आसिफ, सरताज और जरीफनगर थाना क्षेत्र के एक गांव की ग्राम प्रधान का देवर भी शामिल था। प्रधान का देवर सभी लोगों को सुविधाएं मुहैया कराता था। दिल्ली की स्पेशल सेल टीम ने जो लैपटॉप और प्रिंटर आदि बरामद किया था, वह भी प्रधान के देवर का ही था। एक जनवरी को स्पेशल सेल टीम आसिफ नाम के आरोपी को लेकर बदायूं आई थी। तब ग्राम प्रधान के घर पर दबिश दी गई थी लेकिन उस वक्त देवर और उसके परिवार वाले दीवारें कूदकर भाग गए थे, जिससे कोई व्यक्ति स्पेशल सेल के हत्थे नहीं चढ़ा था। बताया जा रहा है कि तब से प्रधान का देवर गांव में दिखाई नहीं दे रहा है। अब स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। एलआईयू और इंटेलीजेंस की टीम भी छानबीन में जुट गई है।

गांव में प्राॅपर्टी डीलिंग का काम बताता था प्रधान का देवर यासीन
ग्राम प्रधान के गांव के लोगों का कहना है कि उनके गांव की प्रधान महिला है लेकिन उसका सारा काम उसका देवर देखता है। इससे वह खुद को ही ग्राम प्रधान बताता है। लोगों से यह भी कहता था कि वह बड़े शहरों में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम कर रहा है। उसका बड़ा कारोबार है। जब दिल्ली की स्पेशल सेल ने गांव में दबिश दी तो ग्रामीणों को सच्चाई पता चली। फिलहाल बताया जा रहा है कि चार-पांच साल में उसने काफी जमीन खरीदी और एक मकान का निर्माण भी करा रहा है। अब सच्चाई क्या है यह पुलिस की जांच का विषय है।

सहसवान पुलिस ने कराया किराएदारों का सत्यापन
सहसवान कोतवाली क्षेत्र की चौकी नंबर चार में स्थित जिस मकान में दानिश अस्पताल और नकली नोट छापने का काम करता था। उस मकान में और भी कई किराएदार रह रहे हैं।इस मकान का मालिक आमिर तो झारखंड में रहता है। लेकिन उसकी पत्नी बानो यहां रहती है और वहीं इस मकान पर किराएदारों को रखती है। इंस्पेक्टर सौरभ सिंह ने बताया कि कोतवाली पुलिस ने उस मकान में रह रहे अन्य किराएदारों का सत्यापन किया है। जिसमें सभी सही पाए गए हैं।

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