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ज्ञानवापी केस: हिंदू पक्ष की बड़ी जीत, जिला अदालत ने तहखाने में दी पूजा-पाठ की इजाजत

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में अदालत ने हिंदू पक्ष के समर्थन में फ़ैसला सुनाया है. वाराणसी की अदालत ने हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार दे दिया है.

अदालत की ओर से जारी आदेश में लिखा गया है – “जिला मजिस्ट्रेट, वाराणसी / रिसीवर को निर्देश दिया जाता है कि वह सेटेलमेण्ट प्लाट नं0-9130 थाना-चौक, जिला वाराणसी में स्थित भवन के दक्षिण की तरफ स्थित तहखाने जो कि वादग्रस्त सम्पत्ति है, वादी तथा काशी विश्वनाथ ट्रस्ट बोर्ड के द्वारा नाम निर्दिष्ट पुजारी से पूजा, राग-भोग, तहखाने में स्थित मूर्तियों का कराये और इस उद्देश्य के लिए 7 दिन के भीतर लोहे की बाड़ आदि में उचित प्रबन्ध करें.”

1993 से यहां पर पूजा-पाठ बंद था.हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, कि अब वहां पर नियमित रूप से पूजा-पाठ शुरू किया जाएगा “ज़िला प्रशासन को सात दिन के अंदर पूजा कराने के लिए इंतज़ाम कराने को कहा गया है. जैसे ही प्रशासन ये कर लेगा, वैसे ही पूजा शुरू हो जाएगी.”

मस्जिद परिसर में पूजा करने के विधि-विधान पर भी जैन ने अपनी टिप्पणी की है.जैन ने कहा, “काशी विश्वनाथ ट्रस्ट ये तय करेगा कि पूजा कैसे होगी. उसे बेहतर पता है. हमारा क़ानूनी काम था जो कि हमने पूरा किया है. अब काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के ऊपर है कि पूजा शुरू हो जाए. भक्तों से लेकर पुजारी आदि सभी को जाने की इजाज़त होगी.”

वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा व्यास परिवार अब तहखाने में पूजा पाठ करेगा. हिंदू पक्ष ने व्यास जी के तहखाने में पूजा पाठ की इजाजत मांगी थी. सोमनाथ व्यास का परिवार 1993 तक तहखाने में पूजा पाठ  करता था. 1993 के बाद तत्कालीन राज्य सरकार के आदेश पर तहखाने में पूजा बंद हो गई थी. 17 जनवरी को व्यास जी के तहखाने को जिला प्रशासन ने कब्जे में लिया था. एएसआई सर्वे कार्रवाई के दौरान तहखाने की साफ-सफाई हुई थी. काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के अधीन तहखाने में पूजा की जाएगी. ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यास जी के तहखाने में पूजा पाठ कराने का कार्य काशी विश्वनाथ ट्रस्ट करेगा.

“मैं ये कहना चाहता हूं कि जो जस्टिस केएम पांडेय ने एक फरवरी, 1986 को राम मंदिर में ताला खोलने का आदेश दिया था. मैं आज के इस ऑर्डर को उसी की तुलना में देखता हूं. ये इस केस का टर्निंग पॉइंट है. एक सरकार ने अपनी ताक़त का दुरुपयोग करते हुए हिंदू समाज की पूजा-पाठ रोकी थी. आज अदालत ने उसे अपनी कलम से ठीक किया है.”

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