होम राज्य उत्तर प्रदेश बदायूँ में दिन दहाड़े बेजुबान “सांड़’ पर भाले से हमला, बाजार के...

बदायूँ में दिन दहाड़े बेजुबान “सांड़’ पर भाले से हमला, बाजार के लोगों ने हमलावर को मय भाले पकड़ कर पुलिस को सौंपा, पशुप्रेमी विकेंद्र शर्मा की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, घटना सीसीटीवी में हुई कैद।

बदायूँ। कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत गद्दी चौक से रजी चौक जाने वाली सड़क पर दिन में 11 बजे के लगभग ग्राम मझिया निवासी रामकिशोर ने रोड पर जा रहे सांड़ पर नुकीले भाले से तीन बार प्रहार कर घायल कर दिया। सांड भाले के प्रहार से गम्भीर रूप से घायल हो गया,भाला का प्रहार इतना गहरा था जिसके लगते ही सांड़ के शरीर से खून का फब्बारा फुट पड़ा सड़क सांड के खून से लाल हो गई। यह पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी में कैद हो गई है घटना का वीडियो शोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिस देख लोगो आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।

सांड़ पर भाले से हमला देख आसपास के लोग आक्रोशित हो गये, आसपास के लोगों ने हमलावर को दौड़ कर पकड़ लिया। हमलावर हमला करने के बाद भाले के नुकीले हिस्से को पीवीसी पाइप व छाते से ढक कर चुप चाप भाग निकला जिसे आसपास के लोगों ने हमलावर को दौड़ कर पकड़ लिया, इस दौरान उधर से गुजर रहे पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने तत्काल इसकी सूचना पशु चिकित्सक व नई सराय पुलिस चौकी दी पुलिस ने मौके पर पहुंच कर हमलावर रामकिशोर को मय भाले पकड़कर कर कोतवाली ले गई।कोतवाली में विकेंद्र शर्मा ने प्रार्थना पत्र देकर आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की । पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने जख्मी सांड का पशु चिकित्सक मुवीन अंसारी की मदद से उपचार कराया और भाला मारने वाले ग्राम मझिया निवासी रामकिशोर के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता और पशु क्रूरता निवारणअधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया है।

कोतवाली में इस दौरान हमलावर की पैरवीकार की ओर से सत्ता पक्ष के जिलास्तरीय नेताओं का हवाला देकर कानूनी कार्यवाही न करने के लिये दबाब बनाया गया इस पर पशुप्रेमी ने घायल सांड़ के पूरे ईलाज व खाने की व्यवस्था किये जाने की मांग की लेकिन इस मांग पर पैरोकार इसे अनावश्यक दबाब बताककर निकल गए।

पैरोकार को यह समझना चाहिए कि यही भाला आरोपी ने किसी आदमी को मारा होता तब ऐसी स्थिति में कानून में धारा 307 के अंतर्गत उस पर मुकदमा चलाया जाता और उसकी सज़ा उम्र कैद होती लेकिन इस बेजुबान को भाला मारना कितना आसान है।काश कानून में जानवर को जान से मारने की नीयत से मारे गए भाले की सज़ा भी कम से कम घायल जानवर के पूरे ईलाज की जिम्मेदारी व स्वस्थ होने तक उसके खाने पीने की व्यवस्था की जिम्मेदारी हमलावर की होती तो न जाने कितने बेजुबान जानबरों की जान बच सकती, पर इस केस में पैरोकार हमलावर को बचाने के लिये शहर के सत्ता पक्ष के बड़े बड़े विधायकों पूर्व विधायकों जिलाध्यक्ष तक से बात करा कर मामला रफ़ा दफा करने की तो बात करता है लेकिन इस घायल बेजुबान सांड़ के इलाज व खाने पीने की जिम्मेदारी लेने को तैयार नही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here