


यूपी में विधान परिषद की 13 सीटों पर चुनाव हुआ है. जिसमें समाजवादी पार्टी ने अपने किसी भी गठबंधन दल को एक भी सीट नहीं दी. जिसके बाद नाराज गठबंधन दलों ने सपा से किनारा करना शुरू कर दिया. अब इसमें एक रोचक वाक्या सामने आया है. दरअसल, महान दल के गठबंधन तोड़ने से नाराज अखिलेश यादव ने केशव देव मौर्य को चुनाव से पहले गिफ्ट की गई फॉर्च्यूनर (Fortuner) गाड़ी अब वापस मांगी ली है.
बताजा जा रहा है कि महान दल द्वारा गठबंधन तोड़ने से अखिलेश यादव बहुत नाराज हैं.इसी के चलते केशव देव मौर्य से सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने फॉर्च्यूनर गाड़ी वापस ले ली है.कहा तो यह जा रहा है कि ये फॉर्च्यूनर गाड़ी अखिलेश यादव ने चुनाव से पहले महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्य को गिफ्ट दी थी. अब खबर आ रही है कि अखिलेश यादव ने ये गाड़ी वापस ले ली है.
क्यों दी थी गाड़ी
महान दल और सपा के बीच नाराजगी की खबरें अब खुलकर सामने आ गई है. दो दिन पहले महान दल के अध्यक्ष ने गठबंधन से अलग होने का एलान किया था. इसकी वजह स्पष्ट तौर पर सीट नहीं मिलने को माना गया. बताया जा रहा है कि इसके बाद सपा के कुछ नेताओं ने अखिलेश यादव को गिफ्ट की गई गाड़ी वापस मांगने के लिए कहा.
बताया जा रहा है कि ये गाड़ी केशव देव मौर्य को आसानी से कैंपेन करने के लिए की गई थी. अब बताया जा रहा है कि अखिलेश के एक सलाहकार ने केशव देव मौर्य को फोन करके गाड़ी वापस करने की बात कही है. जिसके बाद तुरंत ही केशव देव ने वो गाड़ी वापस कर दी है.केशव प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव से इसकी उम्मीद कतई नहीं रही होगी, 2022 के चुनाबों के लिये सपा ने महानदल से गठबंधन किया था और जिसके बदले में महानदल को दो सीटें दी गई थी और दोनों ही सीटों पर महानदल की करारी हार हुई थी,स्वदेश केसरी ने जब इसकी गहराई से पड़ताल की तब सूत्रों से पता चला कि गठबंधन करते समय आठ सीटें तय हुईं, लेकिन दो ही दी गईं। मांगी एटा तो फर्रुखाबाद दी। वहां भी समाज का ही एक व्यक्ति प्रभारी नियुक्त किया गया और उसे चुनाव लड़ने का लालच दिया जाता रहा। अंत में समाज का वोट बंट गया और हार का सामना करना पड़ा।इसी तरह बदायूं की बिल्सी सीट पर सपा ने शाक्य पूर्व से ही समाज की एक महिला को टिकट देने के नाम पर पैसे खर्च करवाए गए और अंत समय मे टिकट काट कर महानदल को दी गई उक्त सजातीय महिला दूसरी पार्टी से लड़ी और समाज का वोट बंट जिसके चलते हार का सामना करना पड़ा।
वोट लिया पर जान-बूझकर हराया
केशव देव ने आरोप लगाया कि हमारा दल आर्थिक रूप से कमजोर है। आर्थिक रूप से मैं भी कमजोर हूं। हम पैसे के अभाव व सपा ने हमे हमारे ही समाज के लोगों की टिकट काटकर महानदल दे दीं,जिससे समाज का वोट नाराज होकर बंट गया जिसके चलते महानदल के प्रत्याशियों की हार हुई,बहीं सपा को महानदल का वोट बैंक ट्रांसफर होने से कई हारी हुई सीटें जीत गई,
स्वामी को बनाया विकल्प, ताकि मैं बड़ा नेता न बनूं
केशव ने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव चाटुकारों से घिरे हैं। उन्होंने हमारा वोट तो लिया लेकिन हमारे लिए स्वामी प्रसाद को विकल्प के तौर पर लाए। हमने उनसे मिलने का समय मांगा, तो हमें नहीं दिया। उन्हें वो पसंद है जो समाज के लिए कोई सवाल न करे और किसी अन्याय के खिलाफ न बोले।हमने कभी कुछ नहीं मांगा और कहा था सरकार बनेगी, तब मांगेंगे। भले ही सरकार न बनी हो, लेकिन जब अब आप दूसरों को दे रहे हो, तो हमारा भी हक बनता है। अकेले एक हाथ से हम कब तक ताली बजाएं।
बदायूँ जिले की दो सीटें महानदल के कारण जीत गई थी सपा। चुनावी विशेषज्ञों का दावा है कि सपा का महानदल से गठबंधन का फायदा बदायूँ जनपद की शेखूपूर,व बिसौली विधान सभा सीट पर मिला। महानदल के गठबंधन के चलते ही दोनों सीटें सपा की झोली में जा गिरीं, बदायूँ व एटा जिले में महानदल की अपने सजातीय लोगों में अच्छी पकड़ है,और आने वाले लोकसभा चुनाबों में सपा को गिफ्ट में दी गई गाड़ी वापिस मांगे जाने का खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

























