बदायूँ।अपना पूरा जीवन धर्म और लोगों की सेवा के लिए न्यौछावर करने वाले सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी महाराज का प्रकाश उत्सव एवं श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसायटी का सालाना समागम बड़े हर्ष उल्लास के साथ संपन्न हो गया। आज सबसे पहले सिख विद्वान, हुजूरी रागी जत्था भाई परमजीत सिंह सुरजीत सिंह के द्वारा आज्ञा दी वार दा कीर्तन किया गया।



शाहजहांपुर से पधारे जसप्रीत सिंह कोमल ने गुरु अर्जुन देव जी के जीवन के बारे में विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि बहुत शांत व गंभीर स्वभाव के स्वामी गुरु अर्जुन देव जी को अपने युग के सर्वमान्य लोकनायक का दर्जा प्राप्त है, जिनमें निर्मल प्रवृत्ति, सहृदयता, कर्तव्यनिष्ठा, धार्मिक एवं मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण भावना जैसे गुण कूट-कूटकर समाये थे। ब्रह्मज्ञानी गुरु अर्जुन देव को आध्यात्मिक जगत में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, जो शहीदों के सरताज और शांतिपुंज भी माने जाते हैं। वह आध्यात्मिक चिंतक और उपदेशक के साथ ही समाज सुधारक भी थे, जो सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ डटकर खड़े रहे। अपने 43 वर्षों के जीवनकाल में उन्होंने धर्म के नाम पर किये जाने वाले आडम्बरों और अंधविश्वासों पर कड़ा प्रहार किया। ,
अमृतसर साहब से आये हरविंदर पाल सिंह ने गुरु महाराज के उपदेश एवं हमारा जीवन विषय पर विस्तार से समझाते हुए कहा कि सिख धर्म का इतिहास मानवता और धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देने की गाथाओं से भरा है। सिख गुरुओं में सबसे पहले शहीदी की महान मिसाल श्री गुरु अर्जुन देव जी ने पेश की।धर्म रक्षक और मानवता के सच्चे सेवक पंचम पातशाह के मन में सभी धर्मों के प्रति अथाह सम्मान था, वे दिन-रात संगत की सेवा में लगे रहते थे। गुरु अर्जुन देव को उनकी विनम्रता के लिए भी स्मरण किया जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में कभी किसी को कोई दुर्वचन नहीं कहा।
कार्यक्रम के अंत मे सुखमनी साहिब सेवा सोसायटी के अध्यक्ष सरदार गुरदीप सिंह ने बाहर से आए हुए रागी जत्थों का धन्यवाद अदा किया । इस दौरान सोसाइटी के सदस्यों के अलावा गुरुद्वारा साहिब के मीत प्रधान सरदार मंजीत सिंह, हरभजन सिंह, रंजीत सिंह, संजय कोचर, आदि का विशेष सहयोग रहा।

























