उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण के चुनाव समापन के बाद अब तीसरे चरण का रण शुरू हो चुका है. 20 फरवरी को तीसरे चरण के लिए यूपी के 16 जिलों की 59 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. साथ ही पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर भी इसी दिन वोटिंग होगी. खास बात ये है कि तीसरे चरण में जिन 16 जिलों में चुनाव होना है उनमें से 9 जिले यादव बहुल आबादी वाले हैं. इसमें फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा और एटा जैसे जिले शामिल हैं. 2017 में 30 यादव बहुल सीटों के बाजवूद एसपी सिर्फ 6 सीटें जीत पाई थी. सत्ता में रहते हुए ये समाजवादी पार्टी का सबसे खराब प्रदर्शन था. यही वजह है कि यादवलैंड को साधने के लिए बीजेपी ब्रिगेड परिवारवाद पर निशाना साध रही है. वहीं एक सवाल उठ रहा है कि क्या दूसरे चरण के दौरान उठा हिजाब विवाद का मामला यूपी में अगले चरणों का वोटिंग समीकरण बदल देगी?
2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी हिंदुत्व की लहर पर सवार थी, जिसका फायदा साफ दिखाई दिया था. इस बार भी मुसलमान और दंगे जैसे शब्दों की गूंज के बाद सबसे ज्यादा शोर हिजाब पर मच रहा है. तीसरे चरण में 30 सीटें ऐसी हैं जो यादव बहुल हैं और ये सीटें फिरोजाबाद कन्नौज, मैनपुरी, इटावा जैसे जिलों में आती हैं. इसी मैनपुरी की करहल सीट से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 59 में से 49 सीटों पर कब्जा किया था. समाजवादी पार्टी के हिस्से 8 सीटें आई थीं. जबकि कांग्रेस और बीएसपी को सिर्फ एक-एक सीट ही मिली थी.

























